Skip to content
BharatKosha
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

by महर्षि वाल्मीकि

DevanagariHindipublished2,621 pages

Page 691 of 2621

Read in context
Page 691

किया गया था। विटङ्कों (कबूतरोंके रहनेके स्थानों—कावकों) और ऊँचे-ऊँचे श्रेष्ठ विमानोंके कारण उन सभी शिविरोंकी बड़ी शोभा हो रही थी॥ १८–२०॥

नाना प्रकारके वृक्षों और वनोंसे सुशोभित, शीतल निर्मल जलसे भरी हुई और बड़े-बड़े मत्स्योंसे व्याप्त गङ्गाके किनारेतक बना हुआ वह रमणीय राजमार्ग उस समय बड़ी शोभा पा रहा था। अच्छे कारीगरोंने उसका निर्माण किया था। रात्रिके समय वह चन्द्रमा और तारागणोंसे मण्डित निर्मल आकाशके समान सुशोभित होता था॥ २१-२२॥

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें अस्सीवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ८०॥