शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
by महर्षि शुक्राचार्य
Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)
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Read in contextतृतीयोऽध्यायः [१५५]
अधिक सोना ), २. तन्द्रा ( अर्द्धनिद्रित अवस्था ), ३. भय, ४. क्रोध, ५. आलस्य, ६. दीर्घ सूत्रता ( थोड़े समय में पूर्ण होने योग्य कार्य को देरी लगाकर करना ) इन ६ दोषों को ऐश्वर्य चाहनेवाले व्यक्ति त्याग कर दें। क्योंकि ये सब दोष कार्य नष्ट करने के लिये समर्थ होते हैं, इसमें कोई सन्देह नहीं है।
उपायज्ञश्च योगज्ञस्तत्त्वज्ञः प्रतिभानवान् ॥ ५७ ॥
स्वधर्मनिरतो नित्यं परस्त्रीषु पराङ्मुखः ।
वक्तोहवांश्चित्रकथः स्यादकुण्ठितवाक् सदा ॥ ५८ ॥
मनुष्य को कौन सा कार्य करना और कौन सा छोड़ना चाहिये इसका निर्देश— प्रत्येक कार्य करने का उपाय और कौशल का जाननेवाला, तत्त्व विषय का ज्ञाता, प्रतिभाशाली, नित्य अपने धर्म में रत एवं परस्त्री से दूर रहनेवाला, वक्ता (बोलने में चतुर), तर्क करनेवाला, नाना प्रकार की मधुर बातें करनेवाला एवं बोलने में कुण्ठित नहीं होनेवाला सदा होना चाहिये।
चिरं संशृणुयान्नित्यं जानीयात्क्षिप्रमेव च ।
विज्ञाय प्रभजेदर्थान्न कामं प्रभजेत् क्वचित् ॥ ५९ ॥
नित्य देर तक बातें सुननी चाहिये अर्थात् पूरी बातें सुननी चाहिये एवं शीघ्र कहनेवालों की बातें समझनी चाहिये। समझकर किसी कार्य को करना चाहिये और कभी मनमानी नहीं करनी चाहिये।
क्रयविक्रयातिलिप्सां स्वदैन्यं दर्शयेन्नहि ।
कार्यं विनाऽन्यगेहे न नाज्ञातः प्रविशेदपि ॥ ६० ॥
किसी वस्तु के खरीदने या बेचने में अत्यन्त आग्रह एवं हर किसी के सामने अपनी दीनता नहीं प्रकट करनी चाहिये क्योंकि इनसे क्रम से लाभ में हानि तथा लघुता होती है। बिना प्रयोजन एवं बिना जान पहचान के स्वयं किसी दूसरे के गृह के अन्दर नहीं घुसना चाहिये।
अपृष्टो नैव कथयेद् गृहकृत्यं तुं कं प्रति ।
बह्वर्थाल्पाक्षरं कुर्यात् संल्लापं कार्यसाधकम् ॥ ६१ ॥
बिना पूछे किसी से कुछ कहने का निषेध— बिना पूछे किसी से अपने घर के कार्य या बातों को नहीं बताना चाहिये। बहुत अर्थों से भरा हुआ एवं थोड़े अक्षरों (शब्दों) से युक्त, कार्य को सिद्ध करनेवाला (मतलब की) सुन्दर वार्तालाप करना चाहिये।
न दर्शयेत् स्वाभिमतमनुभूताद्विना सदा ।
ज्ञात्वा परमतं सम्यक् तेनाज्ञातोत्तरं वदेत् ॥ ६२ ॥
बिना अनुभव के स्वाभिप्राय प्रकट करने का निषेध— बिना अनुभव किये