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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

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२१० : शुक्रनीतिः

आकृत्या चाधिमूल्यं स्याद्रत्नं यद्दोषवर्जितम् ॥ ५४ ॥
दोष वर्जित रत्न के लक्षण— जो रत्न दोषरहित होता है उसका वजन, कान्ति, रङ्ग, आकार का विस्तार, उत्पत्तिस्थान तथा आकार के आधार पर मूल्य अधिक हो जाता है ।

नायसोल्लिख्यते रत्नं विना मौक्तिकविद्रुमात् ।
पाषाणेनापि च प्राय इति रत्नविदो विदुः ॥ ५५ ॥
'मूंगा और मोती को छोड़कर अन्य रत्नों पर लोहे और पत्थर से घिसने पर प्रायः लकीर नहीं पड़ती है' ऐसा रत्न के पारखी लोग कहते हैं ।

मूल्याधिक्याय भवति यद्रत्नं लघु विस्तृतम् ।
गुर्वल्पं हीनमौल्याय स्याद्रत्नं त्वपि सद्गुणम् ॥ ५६ ॥
मूल्य अधिक और कम होने के कारण— जो रत्न दोष से रहित उत्तम होते हुये भी तौल में हल्के किन्तु आकार में बड़े हों तो वे अधिक मूल्य के होते हैं । और जो तौल में भारी किन्तु आकार में छोटे होते हैं वे मूल्य में हीन होते हैं ।

शर्कराभं हीनमौल्यं चिपिटं मध्यमं स्मृतम् ।
दलाभं श्रेष्ठमूल्यं स्याद्यथाकामात्तु वर्तुलम् ॥ ५७ ॥
बालू के समान आकारवाला रत्न हीन मूल्य का होता है । चिपटा रत्न मध्यम मूल्य का और टुकड़ेवाला श्रेष्ठ मूल्य का होता है, और गोल रत्न लेने और बेचनेवाले की आवश्यकता के अनुसार कम या अधिक मूल्यवाले हो जाते हैं ।

न जरां यान्ति रत्नानि विद्रुमं मौक्तिकं विना ।
राजद्रौष्ट्याश्च रत्नानां मूल्यं हीनाधिकं भवेत् ॥ ५८ ॥
मूंगा और मोती को छोड़कर शेष रत्नों के ऊपर पुराना होने का दोष नहीं होता है । राजा की दुष्टता से रत्नों के मूल्य कम या अधिक हो जाते हैं ।

मत्स्या-ऽहि-शङ्ख-वाराह-वेणु-जीमूत-शुक्तितः ।
जायते मौक्तिकं तेषु भूरि शुक्त्युद्भवं स्मृतम् ॥ ५६ ॥
मौक्तिक की उत्पत्ति के स्थानों का निर्देश— मछली, सर्प, शङ्ख, सूअर, बांस, मेघ तथा सीप से मोती उत्पन्न होती है, किन्तु अधिकतर सीप से ही मोती निकलती है ।

कृष्णं सितं पीतरक्तं द्विचतुःसप्तकञ्चुकम् ।
त्रि-पञ्च-सप्तावरण-मुत्तरोत्तरमुत्तमम् ॥ ६० ॥
मोती के रंग और भेद का निर्देश— मोती कृष्ण, श्वेत, पीतयुक्त रक्तवर्ण तथा क्रम से २ कञ्चुक ( परत ), ४ कञ्चुक, ७ कञ्चुकवाली उत्तरोत्तर उत्तम समझी जाती है ।