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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

Page 305 of 526

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Page 305

चतुर्थाध्याये कोशानिरूपणप्रकरणम् २१६

राजभागस्तु रजतशतकर्षमितो यतः ।
कर्षकाल्लभ्यते तस्मै विंशांशमुत्सृजेन्नृपः ॥ ११४ ॥

जिस कृषक से राजा को १०० रूपये भर चांदी (चांदी का रुपया) कर रूप में मिलता हो तो उस (कृषक) के लिये राजा अपने कर में से बीसवां भाग (५ रुपये) अपनी ओर से दे देवे ।

स्वर्णार्धं च रजतात्तृतीयांशं च ताम्रतः ।
चतुर्थांशं तु षष्ठांशं लोहाद्वङ्गाच्च सीसकात् ॥ ११५ ॥
रत्नार्धं चैव क्षारार्धं खनिजाद्व्ययशेषतः ।
लाभाधिक्यं कर्षकादेर्यथा दृष्ट्वा हरेत्फलम् ॥ ११६ ॥
त्रिधा वा पञ्चधा कृत्वा सप्तधा दशधाऽपि वा ।

रजतादियुक्त भूमि के लिये राजभाग-नियम— व्यय को काटकर खान से उत्पन्न होनेवाले सोना से आधा अंश, चांदी से तृतीयांश, तामा से चतुर्थांश, लोहा, वंग तथा सीसा से षष्ठांश, रत्नों से तथा क्षार पदार्थ नमक आदि से आधा अंश एवं कृषक आदि के लाभ की अधिकता देखकर तदनुसार तृतीयांश, पञ्चमांश, सप्तमांश या दशमांश कर ग्रहण राजा को करना चाहिये ।

तृणकाष्ठादिहरकाद्विंशांशं हरेत्फलम् ॥ ११७ ॥

तृणकाष्ठादिविक्रेता आदि से २० वाँ भाग कर लेने का निर्देश— और तृण-काष्ठ आदि लाकर बेचनेवालों से २० वाँ अंश कर लेना चाहिये ।

अजाविगोमहिष्यश्ववृद्धितोऽष्टांशमाहरेत् ।
महिष्यजाविगोदुग्धात्षोडशांशं हरेन्नृपः ॥ ११८ ॥

बकरी आदि की वृद्धि से ८ वां भाग लेने का निर्देश— बकरी, भेड़, गौ, भैंस और घोड़ों की वृद्धि में से अष्टमांश कर राजा ग्रहण करे। भैंस, बकरी, भेड़, तथा गाय के दूध में से १६ वां भाग कर ग्रहण करे ।

कारुशिल्पिगणात्पक्षे दैनिकं कर्मकारयेत् ।
तस्य वृद्ध्यै तडागं वा वापिकां कृत्रिमां नदीम् ॥ ११९ ॥
कुर्वन्त्यन्यत् तद्विधं वा कर्षन्त्यभिनवां भुवम् ।
यद्व्ययद्विगुणं यावन्न तेभ्यो भागमाहरेत् ॥ १२० ॥

कारु आदि से कर लेने के प्रकार का निर्देश— कारु (बढ़ई आदि) तथा शिल्पी (चित्रकार आदि) आदि के वर्गों से हर एक पक्ष (१५ दिन) में एक दिन कर रूप में उनसे मुफ्त में काम करा लेवे । और जो राज्य की उन्नति के लिये तालाब, बावली, या कृत्रिम नदी (नहर) या इसी के समान और किसी दूसरे कार्य का निर्माण करते हैं उन लोगों से तथा जो नवीन भूमि को जोत कर खेती के योग्य बनाते हैं, उन लोगों से जब तक व्यय काटकर दूना