शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
by महर्षि शुक्राचार्य
Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)
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Read in context२८२ शुक्रनीतिः
१०. कान या नाक से मल निकालनेवाला, राजा के समीप में ये ५० दुष्ट (दोष) माने जाते हैं।
आज्ञोल्लङ्घनकारित्वं स्त्रीवधो वर्णसङ्करः।
परस्त्रीगमनं चौर्यं गर्भश्चैव पतिं विना ॥ ८१ ॥
वाक्पारुष्यमवाच्याद्यं दण्डपारुष्यमेव च।
गर्भस्य पातनं चैवेत्यपराधा दशैव तु ॥ ८२ ॥
दश अपराधों का वर्णन— १. आज्ञा का उल्लङ्घन करना, २. स्त्री की हत्या करना, ३. विवाह द्वारा वर्णसङ्करता करना, ४. पर-स्त्री गमन करना, ५. चोरी करना, ६. पति के अलावा अन्य पुरुष से गर्भ होना, ७. कठोर वचन बोलना, ८. नहीं कहने योग्य बातें कहना ९. कठोर दण्ड देना, १०. गर्भ का गिराना इस प्रकार से ये १० अपराध होते हैं।
उत्कृती सस्यघाती चाप्यग्निदश्च तथैव च।
राज्ञो द्रोहप्रकर्ता च तन्मुद्राभेदकस्तथा ॥ ८३
तन्मन्त्रस्य प्रभेत्ता च बद्धस्य च विमोचकः।
अस्वामिविक्रयं दानं भागं दण्डं विचिन्वति ॥ ८४ ॥
पटहाघोषणाच्छादी द्रव्यमस्वामिकं च यत्।
राजाबलीढद्रव्यं च यच्चैवाङ्गविनाशनम् ॥ ८५ ॥
द्वाविंशतिपदान्याहुर्नृपज्ञेयानि पण्डिताः।
राजा द्वारा ज्ञेय २२ पदों का वर्णन— १. उद्वेग करनेवाला २. धान्य (खेती) नष्ट करनेवाला, ३. गृहादि में अग्नि लगानेवाला, ४. राजद्रोह करनेवाला, ५. राजचिह्न को नष्ट करनेवाला, ६. राजा की गुप्त मन्त्रणा को प्रकाशित करनेवाला, ७. कैदियों को जेल से भगानेवाला, ८. बिना स्वामी के वस्तु को बेंच देना, ९. किसी के दान, हिस्सा, और दण्ड को लुप्त करनेवाला, ९. राजा के द्वारा जिस विषय की डुग्गी पिटा दी गई हो, उसको छिपानेवाला, १०. बिना स्वामी के (लावारिस) द्रव्य को ले लेनेवाला, ११. राजा से ले लिये द्रव्य पर अधिकार जमानेवाला, १२. किसी अङ्गों को काट देना, ये पूर्वोक्त १० अपराधों के सहित २२ पद अर्थात् विवाद के स्थान कहे हुये हैं जिसे पण्डितों को जानना चाहिये।
उद्धतः क्रूरवाग्वेषो गर्वितश्चण्ड एव हि ॥ ८६ ॥
सहासनश्चाभिमानी वादी दण्डमवाप्नुयात्।
दण्ड-योग्य वादी के लक्षणों का निर्देश— जो वादी उद्धत स्वभाववाला, निष्ठुर वचन बोलनेवाला एवं निष्ठुर कार्य करने योग्य वेषवाला, गर्वी, अत्यन्त