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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

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चतुर्थाध्याये राजधर्मनिरूपणप्रकरणम् २८५

शङ्काऽसतां तु संसर्गादनुभूतकृतेस्तथा । होढाभिदर्शनात्तत्त्वं विजानाति विचक्षणः ॥ ९९ ॥

दुष्टों के साथ संसर्ग होने से तथा उसके किसी कार्य को देखकर अपराध का अनुमान होने से अभियुक्त के ऊपर अपराध की आशंका होती है । और खोये या लुटे हुये द्रव्य के देखने से बुद्धिमान व्यक्ति अपराध के तत्त्व को अर्थात् यथार्थ रूप से अपराध को जान लेता है ।

अकल्पबालस्थविर-विषमस्थक्रियाकुलान् । कार्यातिपातिद्व्यसनि-नृपकार्योत्सवाकुलान् ॥ १०० ॥ मत्तोन्मत्तप्रमत्तार्त्त-भृत्यान् नाह्वानयेन्नृपः ।

अपराधियों को बुलाने के लिये असमर्थादि भृत्यों को न बुलाने का निर्देश— राजा रोगी, बालक, वृद्ध, विषम परिस्थिति में हुये, अनेक कार्यों में फंसे रहने से व्यस्त, अभियोग (मुकदमा) के समय में अनुपस्थित, व्यसनी, राजा के या किसी उत्सव के कार्यों में फंसे हुये, सुरापानादि से मत्त हुये, उन्मत्त, असावधान तथा दुःखी चित्तवाले ऐसे भृत्यों (चपरासियों) को अपराधी को बुलाने के लिये न बुलावे ।

न हीनपक्षां युवतिं कुले जातां प्रसूतिकाम् ॥ १०१ ॥ सर्ववर्णोत्तमां कन्यां नाज्ञातप्रभुकाः स्त्रियः ।

**हीनपक्षादि स्त्रियों को भी न बुलाने का निर्देश—**हीन पक्षवाली (अनाथा) युवती, अच्छे कुल में उत्पन्न हुई सद्यःप्रसूता ऐसी स्त्री या ब्राह्मण की कन्या या जिनके स्वामी का पता न हो ऐसी स्त्रियों को न्यायालय में न बुलवावे प्रत्युत उसके स्थान पर ही जाकर उससे अभियोग-सम्बन्ध में प्रश्न करे ।

निर्वैष्टुकामो रोगार्तो यियक्षुर्व्यसनेस्थितः ॥ १०२ ॥ अभियुक्तस्तथाऽन्येन राजकार्योद्यतस्तथा । गवां प्रचारे गोपालाः सस्यवापे कृषीवलाः ॥ १०३ ॥ शिल्पिनश्चापि तत्कालमायुधीयाश्च विग्रहे । अख्यातव्यवहारश्च दूतो दानोन्मुखो व्रती ॥ १०४ ॥ विषमस्थश्च नासेध्या न चैतानाह्वयेन्नृपः ।

निर्वैष्टुकाम (विवाहोद्यत) आदि को आसेध (बुलाने) का निषेध— विवाह के लिये उद्यत, रोग से दुःखी, यज्ञ करने में इच्छुक, विपत्ति में पड़ा हुआ, अन्य के द्वारा मुकदमे में फंसा हुआ, राजा के कार्य करने में लगा हुआ, गायों के चराने में लगे हुये अहीर, खेत के बोने में तत्पर किसान, शिल्पी (कारीगर), शस्त्र लेकर युद्ध में लड़ते हुये, व्यवहार को न जाननेवाला, दूत