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शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन

Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan

by श्रीमती हिमांशु द्विवेदी

DevanagariHindipublished208 pages

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पद्म पुराण मे-समुद्र-मन्थन, पृथु उत्पत्ति, वृत्तासुर संग्राम, वामनावतार, मार्कण्डेय, कार्तिकेय की उत्पत्ति, तारकासुर वध, सूर्य एवं चन्द्रवश वर्णन, गायत्री और सावित्री आख्यान, सुव्रत, पृथु, वैण, उग्रसेन, सुकर्मा, नहुष, ययाति, च्यवन एवं शकुन्तलोपाख्यान, ध्रुव-चरित्र, शिवि, उशीनरचरित्र, रावण-जन्म, कपिल-ब्राह्मण वृत्तान्त आदि वर्णित हैं।

अग्निपुराण मे-साहित्य के समस्त विषयों के साथ धार्मिक कथाओं का प्रसङ्ग प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

ब्रह्मवैवर्त पुराण मे-गङ्गा, लक्ष्मी, सरस्वती एवं पृथिवी की कथा, तुलसी, स्वाहा-स्वधा, सावित्री चरित्र, दुर्गा और तारा आख्यान, राधिका आविर्भाव की कथा, गणपति जन्म एवं कर्म और चरित्र का वर्णन, अत्यन्त मुग्धकारी कथायें वर्णित हैं।

कालान्तर में उपर्युक्त शास्त्रों की काव्यधारा में, जैन, बौद्ध कथाओं की धारा का भी सम्मिलन मिलता है। इसीलिए भारतीय कथा-साहित्य की (वैदिक काव्य धारा, जैन काव्य धारा, बौद्ध काव्य धारा) में तीन प्रकार प्रसिद्ध हैं। जैन, बौद्ध कथायें संस्कृत पालि एवं प्राकृत भाषाओ के माध्यम से विश्व कथा-साहित्य में अपना अक्षुण्ण स्थान बनाये हुए है। कथाओं की सर्वोत्कृष्ट कलात्मकता वैदिक कथा धारा में ही निहित है जिसे कीथ जैसे पाश्चात्य विद्वान दुराग्रहवश ब्राह्मणवादी मानते हैं।

लोक में प्रचलित कथाओं को बौद्ध एवं जैनियों ने अपने ढंग से संवारा। बुद्ध के उदात्त चरित्र को प्रस्तुत करते हुये जन्तु कथाओं के द्वारा आदर्श रूप में प्रस्तुत करते हुये लोक में बौद्धों ने भ्रमित लोगों को सन्मार्ग दिया। इनके प्राचीनतम संग्रह अवदानशतक प्रसिद्ध हैं संस्कृत जातकमाला (आर्यशूर-कृत) पालि में रचित बौद्ध कथाओं का निदर्शक है।

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