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सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

by आचार्य चतुरसेन शास्त्री

Source: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (origin)

DevanagariHindipublished222 pages

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मुगम चिकित्सा

२०

दिन काम-काज के लिए बनाया है। इसलिए सुबह उठते ही काम-काज दिन-भर के काम का प्रोग्राम बनालो और उसीके अनुसार काम करो। दिन में सोना घुरी आदत है। गर्मी के दिनों के अलावा कभी दिन-में न सोना चाहिए।

तन्दुरुस्त आदमी को ज्यादा-से-ज्यादा ८ घण्टे सोना काफ़ी है। यों ६ घण्टे की अच्छी नींद भी काफ़ी है। रात को जल्दी सो जाना और सुबह जल्दी उठना बहुत जरूरी है। सोने का कमरा हवादार, खुला और साफ़ हो, ज्यादा आदमी एक कमरे में या एक विस्तार पर नहीं सोने चाहिए। बिछौने पर चादर जरूर बिछाई जाय और वह ४-५ दिन में धो डाली जानी चाहिए। सर्दियों में भी कमरा बन्द न करना चाहिए। न मुँह ढाँपकर सोना चाहिए। जलती हुई अँगूठी कमरे में रख- कर सोना बहुत खतरनाक है, ऐसा कभी न करना चाहिए।