सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)
Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary
by श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह)
DevanagariHindipublished131 pages
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100 करन कारन सो प्रभु समरथु ॥ दृड़ु करि गहहु नामु हरि वथु ॥ इिहु धनु संचहु होवहु भगवंत ॥ संत जना का निरमल मंत ॥ इेक आस राखहु मन माहि ॥ सरब रोग नानक मिटि जाहि ॥१॥ जिसु धन कउ चारि कुंट उठि धावहि ॥ सो धनु हरि सेवा ते पावहि ॥ जिसु सुख कउ नित बाछहि मीत ॥ सो सुखु साधू संगि परीति ॥ जिसु सोभा कउ करहि भली करनी ॥ सा सोभा भजु हरि की सरनी ॥ अनिक उपावी रोगु न जाड़ि ॥ रोगु मिटै हरि अवखधु लाड़ि ॥ सरब निधान महि हरि नामु निधानु ॥ जपि नानक दरगहि परवानु ॥२॥