सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)
Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary
by श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह)
DevanagariHindipublished131 pages
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128 सुनत कमावत होत उधार ॥ आपि तरै लोकह निसतार ॥ सफल जीवनु सफलु ता का संगु ॥ जा कै मनि लागा हरि रंगु ॥ जै जै सबदु अनाहदु वाजै ॥ सुनि सुनि अनद करे प्रभु गाजै ॥ प्रगटे गुपाल महांति कै माथे ॥ नानक उधरे तिन कै साथे ॥३॥ सरनि जोगु सुनि सरनी आइे ॥ करि किरपा प्रभ आप मिलाइे ॥ मिटि गइे बैर भइे सभ रेन ॥ अंमृत नामु साधसंगि लैन ॥ सुप्रसन्न भइे गुरदेव ॥ पूरन होई सेवक की सेव ॥ आल जंजाल बिकार ते रहते ॥ राम नाम सुनि रसना कहते ॥