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सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

by सन्त सुन्दरदास जी

DevanagariHindipublished284 pages

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८६ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ सुख मानै दुख मानै सम्पति विपति मानै, हर्ष मानै शोक मानै मानै रक धन है । घटि मानै वढि मानै शुभ हू अशुभ मानै, लाभ मानै हानि मानै याँह तै कृपन है । पाप मानै पुन्य मानै उत्तम मध्यम मानै, नीच मानै ऊच मानै मानै मेरो तन है । सुरग नरक मानै बध मानै मोक्ष मानै, सुन्दर सकल मानै तातै नाम मन है ॥२१॥ जोई जोई देखै कछु सोई सोई मन आहि, जोई जोई सुनै सोई मन ही कौ भ्रम है । जोई जोई सूँ घै जोई खाई जौ सपर्श होइ, जोई जोई करै सोई मन ही कौ क्रम है ॥ ज ई जोई ग्रहै जोई त्यागै जोई अनुरागै, जहाँ जहां जाइ सोई मन ही कौ श्रम है । जोई जोई कहै सोई सुन्दर सकल मन, जोई जोई कलपै सु मन ही कौ ध्रम है ॥२२॥ एक ही विटप विश्व ज्यौ कौ त्यौ ही देखियत, अति ही सघन ताके पत्र फल फूल है । (२२) श्रम दम, काम । ध्रम धर्म, गुण, स्वभाव ।