स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)
Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)
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(५)
का रंग उसको हर वक्त दीखता रहता है। प्रत्येक तत्व के रंग, स्वाद, रूप चाल आदि का नक्शा नीचे दिया जाता है :-
| नाम तत्व | रंग | स्वाद | स्वरूप | स्वभाव | चाल |
|---|---|---|---|---|---|
| आकाश | काला | कडुवा | कान के सामान | शीतल | १ अंगुल |
| अन्दरहीअं | |||||
| वायु | हरा | खट्टा | गोल | चञ्चल | ९ तिरछी |
| अग्नि | लाल | चर्परा | त्रिकोण | गरम | ४ ऊपर... |
| पृथ्वी | पीला | मीठा | चौकोर | भारी | १३ समुख |
| जल | सफेद | मीठा से | |||
| जरा कम | चन्द्राकार | शीतल | १६ नीचे |
स्वर-ज्ञान की रीति
स्वर पहचानने की साधारण रीति तो यह है कि साधक शान्तीरिति से बैठकर श्वास कहीं तक नीचे जाता है उसे नाप ले। साधारणतः तत्व मालूम हो ही जावेगा। यदि नासिका के अन्दर ही अन्दर श्वास रहे, तो आकाश तत्व जाने। ४ अंगुल बाहर आवे तो अग्नि तत्व—८ अंगुल बाहर आवे तो वायु तत्व, १२ चंगुल बाहर आवे तो पृथ्वी तत्व, १६ अंगुल बाहर आवे, तो जल तत्व समझना चाहिए।
इसकी एक दूसरी विधि भी है। एक आइना या दर्पण को साफ करके उस पर जोर से श्वास मारो ताकि दर्पण श्वास की भाप से धुंधला हो जाये, फिर देखो कि इस धुंधलेपन का क्या स्वरूप होता है।