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वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

by महर्षि कणाद

Source: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (origin)

DevanagariSanskritpublished160 pages

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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri २८ वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद जिस प्रकार पृथिवी आदि ३ भूत चक्षुर्विषय हैं, इस प्रकार वायु समीप होने पर भी आंख से नहीं दीखता, इस लिये इस के लिङ्ग (स्पर्श) को दृष्ट नहीं माना जाता । यहां प्रयोग किया "प्रत्यक्ष" शब्द न्यायदर्शनोक्त लाक्षणिक नहीं है, किन्तु वह " आंखों देखे " अर्थ में प्रयुक्त है । क्योंकि त्वचा इन्द्रिय का प्रत्यक्ष तो है ही है ॥ १५ ॥ ६४—सामान्यतोदृष्टाच्चाविशेषः ॥ १६ ॥ (सामान्यतोदृष्टात्) सामान्यतोदृष्ट से (च) भी (अविशेषः) सामान्य सिद्ध है ॥ जिस प्रकार विषाण पुच्छ सास्नादि को देख कर गौ बैल पहचाने जाते हैं, इस प्रकार स्पर्श से वायु नहीं पहचाना जाता है। क्योंकि वायु स्पर्श होने पर भी गौ आदि के समान दीखता नहीं, तथापि जहां २ हम क्रिया देखते हैं वहां २ किसी करण=साधन को पाते हैं, और जहां कोई गुण देखते हैं, वहां उस का आश्रयभूत कोई द्रव्य अवश्य पाते हैं, बस स्पर्श गुण को पाकर उस के आश्रय द्रव्य वायु को भी अनुमान करना चाहिये, परन्तु इस सामान्यतोदृष्ट अनुमान से इतना सिद्ध होता है कि स्पर्श का भी कोई द्रव्य है, बस इस सामान्य से अतिरिक्त विशेष वायु आदि संज्ञा नहीं सिद्ध होती, इस कारण अविशेष रहा ॥ हम देखते हैं कि रूपादि गुण अपने तेज आदि द्रव्यों के आश्रय रहते हैं, और स्पर्श भी गुण है, वह भी किसी द्रव्य के आश्रय रहना चाहिये क्योंकि १६ वें सूत्रानुसार गुण का लक्षण "द्रव्याश्रयी" आवश्यक बता चुके हैं, बस स्पर्श गुण का आश्रय द्रव्य भी कोई होना चाहिये, वही वायु है। ताशे नंगारे बजते समय हम देखते ही हैं कि द्रव्यों की परस्पर चोट से शब्द उत्पन्न होता है, तब वृक्षों के पत्तों का हिलना और उस से शब्द होना देख कर अनुमान करते हैं कि वृक्षों के पत्तों का हिलाने वाला भी कोई द्रव्य है, जो रूप वाला नहीं, क्योंकि दीखता नहीं, परन्तु स्पर्श वाला और वेग वाला है जो चलता और पत्तों से रगड़ कर शब्द करता है। जिस २ पदार्थ का धारण हम देखते हैं, वह २ धारण किसी द्रव्य द्वारा हो रहा है, जैसे पृथिवी पर्वत वृक्षादि को, वृक्षादि फलादि को धारण करते हैं, नौका को जल धारण करता है, इसी प्रकार आकाश में वृक्षों, तूलों, मेघों, विमानों CC-0.Panini Kanya Maha Vidyalaya Collection.