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वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

by महर्षि कणाद

Source: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (origin)

DevanagariSanskritpublished160 pages

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५८ वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद ९ स्वर गिनते हैं, वे ५२ अक्षरों के सामान्य में ही सब विशेषों का अन्तर्भाव कर लेते हैं। जो और अधिक भेद गिनने लगें तो एक अकार के ही १८ भेद कल्पित करते हैं ॥ इति द्वितीयाऽध्यायस्य द्वितीयमाह्निकम् इति श्री तुलसीरामस्वामि कृते वैशेषिकदर्शन भाषानुवादे द्वितीयोऽध्यायः ॥२॥

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