BharatKosha
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

by महर्षि कणाद

Source: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (origin)

DevanagariSanskritpublished160 pages

Page 6 of 160

Read in context
Page 6

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri २ वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद क्योंकि वेदादि शास्त्र धर्म का वखान करते हैं, इस कारण लोक उन प्रमाण मानता है ॥ यदि वेदादि शास्त्र में अभ्युदय और मोक्ष के साधन धर्म का वर्णन न होता तो लोक उस को निरर्थक जान कर प्रमाण न करता, परन्तु वेदादि शास्त्र में धर्म का निरूपण है और धर्म मनुष्य के ऐहिक आमुष्मिक कल्याण का साधन है, इस लिये लोक वेदादिशास्त्र में प्रामाण्यबुद्धि रखता है और रखनी चाहिये भी ॥ यही बात मीमांसादर्शन १ । १ । २ में कही गई है कि- "चोदनाल- क्षणोऽर्थो धर्मः" जिस की प्रेरणा वेद आदि शास्त्र करता है, वह धर्म है। तथा मनु २ । १३ में भी यही कहा है कि "धर्मं जिज्ञासमानानां प्रमाणं परमं श्रुतिः" धर्म के जिज्ञासुओं को परम प्रमाण वेद है। मनु ४ । १४ में भी कहा है कि- वेदोदितं स्वकं कर्म नित्यं कुर्यादतन्द्रितः । तद्धि कुर्वन् यथाशक्ति प्राप्नोति परमां गतिम् ॥ अर्थात् वेदप्रतिपादित स्वधर्म का अनुष्ठान निरालस्य होकर सदा करे क्योंकि यथाशक्ति उस का करने वाला परम गति (मोक्ष) को प्राप्त हो जाता है ॥४॥ वेदादि शास्त्रोक्त धर्म किस रीति वा क्रम से मनुष्य की मुक्ति का हेतु है, सो वर्णन करते हैं:- ४-धर्मविशेषप्रसूताद् द्रव्यगुणकर्मसामान्यविशेषसम- वायानां पदार्थानां तत्त्वज्ञानान्निःश्रेयसम् ॥ ४ ॥ (धर्मविशेषप्रसूतात्) पुण्यविशेष से उत्पन्न हुये, (द्रव्यगुणकर्मसामान्य- विशेषसमवायानाम्) १-द्रव्य २-गुण ३-कर्म ४-सामान्य ५-विशेष और ६- समवाय (पदार्थानाम्) ६ पदार्थों के (साधर्म्यवैधर्म्याभ्याम् : साधर्म्य और वैधर्म्य से होने वाले (तत्त्वज्ञानात्) तत्त्वज्ञान से (निःश्रेयसम्) मोक्ष होता है। तत्त्वज्ञान से मोक्ष होता है, यह फलितार्थ है। तत्त्वज्ञान का १ विशे- षण 'धर्मविशेषप्रसूत' है अर्थात् वह तत्त्वज्ञान जो कि पुण्यविशेष से उत्पन्न हुआ है, २-विशेषण-विशेष्य तत्त्वज्ञान से अन्वित यह है कि "द्रव्यगुण- वैधर्म्याभ्याम् तत्त्व०" द्रव्यादि ६ पदार्थों के साधर्म्य और वैधर्म्य से तत्त्व CC-0.Panini Kanya Maha Vidyalaya Collection.