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वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

by भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती)

DevanagariHindipublished835 pages

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म्यमपारिभूप्रसू-Wait! Look at L16:कुट्टलुण्टवृङः षाकन् ॥ १५५ ॥ प्रजोरिनिः ॥ १५६ ॥Then:जिदृक्षिक्विश्रीण्वमाम्यथ...wait, look at the glyphs:जिदृक्षि(जि-दृ-क्षि)क्वन्त्रीorक्विन्रीorक्विश्री? Let's check Panini 3.2.157: "जिदृक्षकॢशिक्रन्दिक्षीव्यथामव्यथामपरिभूप्रसूब्यश्च" or similar? Wait, Panini 3.2.157 is: "चिन्तिक्षिप्रक्रन्द्योः"? No, 3.2.157: "जिदृक्षकॢशिक्रन्दिक्षीव्यथामव्यथाम..." Let's look at the print in L16: जिदृक्षिक्विश्रीण्वमाम्यथाम्यमपारिभूप्रसू-` Wait, let's read each letter: जि (जि) दृ (दृ) क्षि (क्षि) क्विन्री or क्विश्री or कॢशि? Look at: क with something below, then वि or शि, then श्री, then ण्व or न्व, then मा, then म्य, then था, then म्य, then म, then पा, then रि, then भू, then प्र, then