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वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

by भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती)

DevanagariHindipublished835 pages

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न्orट्कन्? It looks very much like ट्कन्. Let's preserve what is printed: हलसीराट्कन्`.

Line 22: ॥ ८३ ॥ धनगणं लब्धा ॥ ८४ ॥ अन्नाण्णः ॥ ८५ ॥ वशं गतः ॥ ८६ ॥ पदमस्मिन्द्व- Wait, sutra 83 text was in line 21: विध्यत्यधनुषा ॥ Then line 22 starts with ॥ ८३ ॥! Wait, is line 21 ending with or does it not? Line 21 ends with: विध्यत्यधनुषा ॥ And line 22 starts with: ॥ ८३ ॥! Wait, line 21 has: विध्यत्यधनुषा ॥ and then line 22 has: ॥ ८३ ॥ धनगणं लब्धा ॥ ८४ ॥ अन्नाण्णः ॥ ८५ ॥ वशं गतः ॥ ८६ ॥ पदमस्मिन्द्व- Wait, is अन्नाण्णः or अन्नान्नः? Look at 4.4.85: अन्नाण्णः! Letters: न्ना ण्णः -> अन्नाण्णः. Yes, ण्णः!

Line 23: `द्वयम् ॥ ८७ ॥ मूलमस्या

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