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वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara by Sadananda Yogindra

by सदानन्द योगीन्द्र

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1940 (origin)

DevanagariSanskritpublished145 pages

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( ४० ) वेदान्तसार । तन्मात्राण्यपंचीकृतानि चोच्यन्ते । एतेभ्यः सूक्ष्मशरीराणि स्थूलभूतानि चोत्पद्यन्ते ॥४०॥ (सं०टी०) नन्वाकाशादिप्रपंचोत्पादकचैतन्यावच्छेदका- ज्ञाने कुतः तमःप्राधान्यमित्याशंक्याह । तेष्विति । कारण- गुणा हि कार्यगुणानारभंत इति न्यायादिति भावः।ननु त्रिगुणा- त्मकत्वादज्ञानस्य कथं तमोगुणमात्रप्राधान्येनाकाशादिजनक- त्वमित्याशंक्याह।तदानीमिति।तदानीमुत्पत्तिवेलायां सत्वादयः त्रयोपि गुणाः तारतम्येन कारणप्रक्रमन्यायेन तेष्वाकाशादिषु पंचभूतेषूत्तरोत्तराधिक्येन जायंते इत्यर्थः । इमान्येव सूक्ष्म- शरीरादिकारणभूतान्यपंचीकृतानि सूक्ष्मरूपतन्मात्राणीत्युच्यं त इत्याह।एतान्येवेति। “पंचप्राणमनोबुद्धिदशेन्द्रियसन्वितम् अपंचीकृतभूतोत्थंसूक्ष्मांगं भोगसाधनम्”इति वचनादप्यपंची- कृतभूतेभ्यो पंचीकृतसूक्ष्मशरीराणि पंचीकृतस्थूलभूतानि चो- त्पद्यंत इत्याह । एतेभ्य इति ॥ ४० ॥ ( भा०टी० ) उन उत्पन्न आकाशादिमें जड़ताका आ- धिक्य होनेसे उनका कारण तमोगुण प्रधान मालूम होता है उन आकाशादिकी उत्पत्तिके अनन्तर उनके कारण गुणोंके तारतम्यके अनुसार सत्त्वगुण रजोगुण और तमोगुण इनकी उत्पत्ति होती है। एवं पूर्वोक्त अवस्थाको प्राप्त हुए आका- शादिक सूक्ष्मभूत, महाभूत, पश्चतन्मात्रा और अपञ्चीकृत कहे जाते हैं इन्हीं सूक्ष्मभूतसे सूक्ष्मशरीर और स्थूलशरीर- उत्पन्न होते हैं ॥ ४० ॥