यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextपूर्वार्ध बारहवां अध्याय धन प्रदान करते हैं. उस को सौभाग्यशाली और महान् महिमावान बनाते हैं. आप हमारे लिए भौतिक और आध्यात्मिक वैभव धारण करते हैं. ( ११० ) ऋतावानं महिषं विश्वदर्शतर्माग्न ँ सुम्नाय दधिरे पुरो जनाः. श्रुत्कर्ण ँ सप्रथस्तमं त्वा गिरा दैव्यं मानुषा युगा.. (१११) हे अग्नि! आप सत्यवान, महिमाशाली व समस्त विश्व के लिए दर्शनीय हैं. हम नगरवासी अच्छे मन के लिए आप को धारण करते हैं. आप प्रसिद्ध और प्रथम वंदनीय हैं. मनुष्य युगयुग से दिव्य गुणों वाले आप का गुणगान करते हैं. ( १११ ) आ प्यायस्व समेतु ते विश्वतः सोम वृष्ण्यम्. भवा वाजस्य सङ्गथे.. (११२) हे सोम! विश्व की तेजस्विता आप को प्रसन्न करे. आप वृद्धि को प्राप्त करने की कृपा करें. आप अन्न की संगति के लिए हमारे पास पधारने की कृपा करें. ( ११२ ) सन्ते पया ँ सि समु यन्तु वाजाः सं वृष्ण्यान्यभिमातिषाहः. आप्यायमानो अमृताय सोम दिवि श्रवा ँ स्युत्तमानि धिष्व.. (११३) हे सोम! आप पोषक रस और अन्न बरसाने की कृपा करें. आप अमृत से तृप्त कीजिए. आप स्वर्गलोक में विख्यात हैं. आप चिरकाल तक स्थिर होने की कृपा कीजिए. ( ११३ ) आप्यायस्व मदिन्तम सोम विश्वेभिर ँ शुभिः. भवा नः सप्रथस्तमः सखा वृधे.. (११४) हे सोम! आप आनंददाता हैं. आप सर्वत्र प्रसन्न होने की कृपा कीजिए. आप शुभ होइए. आप विख्यात और हमारे मित्र हैं. आप बढ़ोतरी पाइए. ( ११४ ) आ ते वत्सो मनो यमत्परमाच्चित्सधस्थात्. अग्ने त्वाङ्कामया गिरा.. (११५) हे अग्नि! हम आप के पुत्र हैं. आप परम स्थान पर विराजते हैं. हम श्रेष्ठ स्तोत्रों से आप की वाणीमय वंदना करते हैं. ( ११५ ) तुभ्यन्ता ऽ अङ्गिरस्तम विश्वाः सुक्षितयः पृथक्. अग्ने कामाय येमिरे.. (११६) हे अग्नि! आप श्रेष्ठ अंगों वाले हैं. आप के प्रति पृथ्वी की श्रेष्ठ प्रार्थनाएं अलग से समर्पित की जाती हैं. हम अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए आप की उपासना करते हैं. ( ११६ ) अग्निः प्रियेषु धामसु कामो भूतस्य भव्यस्य. सम्राडेको वि राजति.. (११७) १५८ - यजुर्वेद