यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextपूर्वार्ध तीसरा अध्याय हे अग्नि! आप बुलाने योग्य व सर्वविद् हैं. आप हमारे लिए श्रेष्ठ धन धारण करने व हमारे पास आने की कृपा कीजिए. आप सम्राट् हैं. आप शोभा सहित पधारिए और हमें भी शोभा प्रदान करने की कृपा कीजिए. ( ३८ ) अयमग्निर्गृहपतिर्गाहर्पत्यः प्रजाया वसुवित्तमः. अग्ने गृहपतेभि द्युम्नमभि सह आ यच्छस्व.. (३९) ये अग्नि गृहपति हैं. हमारी संतान के लिए धन देने वाले हैं. हे अग्नि! आप गृहपति हैं. आप शोभा सहित पधारिए और हमें भी शोभा प्रदान करने की कृपा कीजिए. ( ३९ ) अयमग्निः पुरीष्यो रयिमान् पुष्टिवर्धनः. अग्ने पुरीष्याभि द्युम्नमभि सह ऽ आ यच्छस्व... (४०) यह अग्नि दक्षिण, धनवान व पुष्टिवर्धक है. हे अग्नि! आप वैभववर्धक हैं. आप शोभा सहित पधारिए और हमें भी शोभा प्रदान करने की कृपा कीजिए. ( ४० ) गृहा मा बिभीत मा वेपध्वमूर्जं बिभ्रत ऽ एमसि. ऊर्जं बिभ्रद्वः सुमनाः सुमेधा गृहानैमि मनसा मोदमानः.. (४१) हे घर! भयभीत और कांपिए मत. हम ऊर्जस्वी ( तेजवान ) होने के लिए आप के पास आते हैं. हम ओज संपन्न हो कर आप में प्रविष्ट होते हैं. हम श्रेष्ठ बुद्धिमान दुःखहीन हो कर आप में प्रविष्ट होते हैं. ( ४१ ) येषामध्येति प्रवसन्येषु सौमनसो बहुः. गृहानुपह्वयामहे ते नो जानन्तु जानतः.. (४२) प्रवास के समय जिस के बारे में सोचते हैं, अच्छे मन से उस घर में प्रसन्नता से रह रहे हैं. घर के पास रहने वाले देवता ज्ञानी हैं. वे देवता हमारे इस भाव को जानने की कृपा करें. ( ४२ ) उपहूता ऽ इह गाव ऽ उपहूता ऽ अजावयः. अथो अन्नस्य कीलाल ऽ उपहूतो गृहेषु नः. क्षेमाय वः शान्त्यै प्रपद्ये शिव ँ शग्म ँ शंयोः शंयोः.. (४३) हमारे घर में सुख से रहने के लिए गायों, भेड़ों व बकरियों को सम्मान से बुलाया गया है. अन्न की समृद्धि हेतु हम इन का आह्वान करते हैं. हम कल्याण व अनिष्ट निवारण हेतु आप का आह्वान करते हैं. हम लौकिक और पारलौकिक सुख पाना चाहते हैं. ( ४३ ) प्रघासिनो हवामहे मरुतश्च रिशादसः. करम्भेण सजोषसः.. (४४) हे मरुद्गणो! आप शत्रुओं की हिंसा करने वाले व हवि का भक्षण करने वाले हैं. हे मरुद्गणो! आप दही मिश्रित सत्तू का भक्षण करने वाले हैं. ( ४४ ) ५२ – यजुर्वेद