BharatKosha
यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)

by स्वामी अड़गड़ानन्द

Source: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (origin)

DevanagariHindipublished429 pages

Page 241 of 429

Read in context
Page 241

२०६ श्रीमद्भगवद्गीता : यथार्थ गीता यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्। यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम् ।।२७।। अर्जुन! तू जो कर्म (यथार्थ कर्म) करता है, जो खाता है, जो हवन करता है, समर्पण करता है, दान देता है, मनसहित इन्द्रियों को जो मेरे अनुरूप तपाता है, वह सब मुझे अर्पण कर अर्थात् मेरे प्रति समर्पित होकर यह सब कर। समर्पण करने से योग के क्षेम की जिम्मेदारी मैं ले लूँगा। शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः। संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि ।।२८।। इस प्रकार सर्वस्व के न्यास संन्यास योग से युक्त हुआ तू शुभाशुभ फलदाता कर्मों के बन्धन से मुक्त होकर मुझे प्राप्त होगा। उपर्युक्त तीन श्लोकों में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने क्रमबद्ध साधन और उसके परिणाम का चित्रण किया है- पहले पत्र-पुष्प, फल-जल का पूर्ण श्रद्धा से अर्पण, दूसरे समर्पित होकर कर्म का आचरण और तीसरे पूर्ण समर्पण के साथ सर्वस्व का त्याग। इनके द्वारा कर्मबन्धन से विमुक्त (विशेष रूप से मुक्त) हो जायेगा। मुक्ति से मिलेगा क्या? तो बताया, मुझे प्राप्त होगा। यहाँ मुक्ति और प्राप्ति एक दूसरे के पूरक हैं। आपकी प्राप्ति ही मुक्ति है, तो उससे लाभ? इस पर कहते हैं- समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः। ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम् ।।२९।। मैं सब भूतों में सम हूँ। सृष्टि में न मेरा कोई प्रिय है और न अप्रिय है; किन्तु जो अनन्य भक्त है, वह मुझमें है और मैं उसमें हूँ। यही मेरा एकमात्र रिश्ता है। मैं उसमें परिपूर्ण हो जाता हूँ। मुझमें और उसमें कोई अन्तर नहीं रह जाता। तब तो बहुत भाग्यशाली लोग ही भजन करते होंगे? भजन करने का अधिकार किसे है? इस पर योगेश्वर श्रीकृष्ण कहते हैं- अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्। साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः ।।३०।।

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द) · Page 241 of 429 · BharatKosha