योगतारावली (आदि शङ्कराचार्य - अमनस्क दशा, नादानुसन्धान एवं राजयोग रहस्य सटीक)
Yogataraavali of Adi Shankaracharya with Commentary
by आदि शङ्कराचार्य (व्याख्याकार: डॉ. रामशङ्कर भट्टाचार्य)
Page 50 of 52
Read in context( ३६ ) मनोलय .... ४ विष्णुपद .... ४ मनोविलय .... २८ विष्णुपदान्तराल .... १२ ममत्व .... २२ वैकृत (पूरक) .... १० मरण .... १५ शरीर (निभृत) .... २१ मरुत्-लय .... १३ शान्ति .... २० महामति .... १३ श्रीराजयोग .... १६ मारुतवृत्ति .... २२ श्रीशैल .... २८ मुनि .... २१ श्वसन .... १३ मूलबन्ध .... ५,६ श्वासप्रचार .... १८ मूलाधार (आधार) .... ७ संकल्प .... १९,२० मोह .... १ संकल्प-विकल्प .... २५ यमीन्द्र .... २२ संकल्पशून्य (मनः) .... १७ योगनिद्रा (अजाड्यनिद्रा .... २४ सदाशिव .... २ योगनिद्रा .... २५ सन्तापित चन्द्रमाः .... ७ राजयोग .... १४,१५,१६ समाधि .... २८ रेच (रेचक) .... ३ संविद् (केवलसंविद्) .... १६ लता .... २८ संविन्मयी .... २३,२६ लय .... २ संसार .... १ लयावधान .... २ संस्तम्भितश्वासः .... ९ वायु ( गन्धवाह ) .... ६ संस्तम्भितावास .... ९ वायु (वर्जितरेचपूर) .... १७ सहज .... २२ वायुरोध .... १४ सहजावस्था .... २३ वायुलय (मरुल्लय) .... १३ सावधान .... ६,१६,२० विकल्प .... २५ सिद्धि .... २८ विकल्पशून्य (मन) .... १७ सुषुप्ति .... १५ विलय .... ११,१२ सुषुम्ना .... ६ विश्रान्ति .... २६ स्वात्मावगम्य .... ३ विश्वादि-अवस्था .... २६ हठ .... १० विषयप्रवाह .... ८ हालाहल .... १