ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय
Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)
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Read in context९० [ दूसरी पञ्चिका यह यूप वज्र है। इसमें आठ धारें होनी चाहियें। वज्र में आठ धारें होती हैं। जब कोई वज्र को अपने शत्रु या वैरी पर मारता है वह मर जाता है। जो वध करने के योग्य है उसका वध करने के लिये। यूप वज्र है जो शत्रु के मारने के लिये खड़ा किया जाता है। इसलिये जो यजमान से द्वेष करता है वह यह देखकर कि यह अमुक पुरुष का यूप है हानि को प्राप्त हो जाता है। स्वर्ग की कामना वाला खदिर का यूप बनावे। क्योंकि खदिर का यूप बना कर ही देवों ने स्वर्ग को प्राप्त किया। इसी प्रकार खदिर का यूप बना कर ही यजमान स्वर्ग लोक को प्राप्त करता है। जो अन्न और पुष्टि की इच्छा करे वह बिल्व का यूप बनावे। बिल्व पर हर साल फल आता है। वह अन्न आदि का रूप है। वह मूल से शाखा तक बढ़ता है और पुष्टि का द्योतक है। जो इस रहस्य को समझ कर बिल्व का यूप बनाता है वह अपने बच्चों और पशुओं को पुष्ट करता है। बिल्व के यूप के विषय में यह बात है कि बिल्व ज्योति है। जो इस रहस्य को समझता है वह अपने जाति वालों में ज्योति होता है श्रेष्ठ होता है। जिस को तेज और ब्रह्मज्ञान की इच्छा हो वह पलाश का यूप बनावे। वनस्पतियों में पलाश तेज और ब्रह्मवर्चस है। जो इस रहस्य को समझ कर पलाश का यूप बनाता है वह तेजस्वी और ब्रह्मवर्चस्वी होता है। पलाश के यूप के विषय में यह है कि पलाश सब वनस्पतियों की योनि है। इसीलिये पलाश वृक्ष के पलाशों अर्थात् पत्तों का अनुकरण करके ही हर वृक्ष के पत्तों को पलाश कहते हैं। जो