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ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय

Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished592 pages

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तीसरा अध्याय २५—सोम राजा दूसरे लोक में था। देवों और ऋषियों दोनों ने सोचा कि सोम राजा कैसे हम तक आवे। उन्होंने कहा, "छन्दो, तुम सोम राजा को हम तक लाओ।" वह मान गये और सुपर्ण ( पक्षी ) बन कर उड़े। चूंकि वह सुपर्ण बन कर उड़े इसलिये इस घटना को आख्यान के जानने वाले सौपर्ण- आख्यान कहते हैं। जो छन्द सोम राजा को लेने उड़े थे वह चार अक्षर के थे। क्योंकि तब चार अक्षर के ही छन्द थे। जगती अपने चार अक्षरों से सबसे पहले उठी। वह आधी दूर उड़कर ही थक गई, उसके तीन अक्षर जाते रहे। वह एक अक्षर की रह गई तब उसने ( स्वर्ग से ) दीक्षा और तप लिये और इस लोक को लौट आई। जिसके पशु होते हैं वह दीक्षा और तप वाला होता है। पशु जगती के हैं। जगती उनको अपने साथ लाई थी। अब त्रिष्टुभ् उड़ा। वह आधी से अधिक दूर जाकर थक गया और उसका एक अक्षर जाता रहा। उसके तीन अक्षर रह गये। और ( स्वर्ग से ) दक्षिणा को लेकर लौट आया। इसलिये ( १८९ )