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ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय

Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished592 pages

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१२ [ ऐतरेय-ब्राह्मण . त्यों बनी रहती हैं। हमें यह अभीष्ट नहीं है। अब अन्त की बात रह जाती है अर्थात् फिर अनुवाद ही क्यों किया जाय। इसका एक मात्र उत्तर यह है कि हिन्दी भाषा भाषियों के पास कोई ऐसी चीज़ अवश्य होनी चाहिये जिससे वह संस्कृत साहित्य की झलक देख सकें और पेचदार स्थलों पर अपनी बुद्धि लगा सकें। ऐतरेय ब्राह्मण में ऐसी उलझनों का बाहुल्य है। क्या गाथायें, क्या यज्ञ की क्रियाओं के पक्ष में युक्तियाँ, शंकाओं का समाधान सभी विचित्र हैं और गुत्थियाँ सुलझाने में चतुर लोगों के लिये पर्याप्त सामग्री उपस्थित करते हैं। कम से कम लोगों को यह तो पता लग ही जायगा कि यज्ञ की क्रियायें कितनी जटिल, कितनी महत्त्वपूर्ण और कितनी उपयोगी हैं। हमने उन मन्त्रों को प्रायः पूरा-पूरा दिया है जिनकी मूल ग्रन्थ या भाष्य में केवल प्रतीकें ही दी गई हैं। बहुत बड़े सूक्त छोड़ दिये हैं अन्यथा पुस्तक का कलेवर बहुत बढ़ जाता। कहीं- कहीं मन्त्रों के अर्थ भी दे दिये हैं। हमारे इस अनुवाद में त्रुटियाँ बहुत मिलेंगी। हमको स्वयं अपनी कृति सन्तोषजनक प्रतीत नहीं होती। परन्तु आशा है कि हमारे पश्चात् कार्य करने वाले सज्जन उत्तरोत्तर विशदता का समावेश कर सकेंगे। ऐतरेय ब्राह्मण, ऐतरेय ( महीदास ) ऋषि का बना हुआ बताया जाता है। ग्रन्थ में कोई ऐसी साक्षी नहीं है जिससे 'ऐतरेय' मुनि के विषय में कुछ ज्ञात हो सके। कहते हैं कि 'इतरा' एक नीच कुल की स्त्री थी। उसी से उत्पन्न होने के कारण माता के नाम पर इनका ऐतरेय नाम पड़ा। जैसे 'जाबाल' का। हमारा इन गाथाओं पर विश्वास नहीं। यह ठीक है कि किसी पुरुष का बड़ा होना उसके कुल के आश्रित नहीं है। अच्छे कुल में बुरे और बुरे कुल में अच्छे उत्पन्न हुआ ही करते हैं। परन्तु एक बात हमको बहुत खटकती है। वैदिक साहित्य में जिन-जिन बड़े