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ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय

Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished592 pages

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तीसरा अध्याय ] ३२७ इसमें 'ऊर्ध्व' आया है। यह आठवें दिन का रूप है। द्यावापृथिवी के निविद् यह हैं :— मही द्यौः पृथिवी चन ( ऋ० १।२२।१३-१५ ) इसमें 'महद्' है। यह आठवें दिन का रूप है। ऋभुओं का निविद् यह है :— युवाना पितरा पुनः ( ऋ० १।२०।४-८ ) इसमें 'पुनः' है। यह आठवें दिन का रूप है। 'इमा नु कं भुवना सीषधाम' में ( १०।१५७ ) दो पद वाले मंत्र हैं। अब यह पढ़े जाते हैं। मनुष्य दो पाया है। पशु चौपाया। पशु छन्दोम हैं। पशुओं की वृद्धि के लिये। इस सूक्त का पाठ करके होता यजमान को चौपाये पशुओं में स्थापित करता है। विश्वेदेवों का निविद् सूक्त यह हैं :— देवानामिदवो महद्......( ऋ० ८।८३।१ ) इसमें महद् शब्द है। यह आठवें दिन का रूप है। यह गायत्री छन्द में हैं। इस त्र्यह के तीसरे सवन का वाहक गायत्री छन्द है। अग्नि मारुत शस्त्र का प्रतिपद् यह है :— ऋतावान वैश्वानरं ( आश्व० श्रौत सूत्र ८।१० ) इसमें 'वैश्वानरं महान्' में महद् शब्द आया है। यह आठवें दिन का रूप है। मरुतों का निविद् सूक्त यह है :— क्रीडं वः शर्धो मारुतम्। ( ऋ० १।३७ ) इसमें 'वावृध' शब्द आया है। 'वृधन' आठवें दिन का रूप है। जातवेद मंत्र वही है :—जातवेदसे सुनवाम... जातवेद का निविद् सूक्त यह है :—