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ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय

Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished592 pages

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चौथा अध्याय ] ३९१ यजमान के लिये इनको इसी प्रकार पढ़ा था। उसने कहा था, 'मैंने यजमान के लिये बहुत पशु पकड़ लिये। बहुत अच्छे मुझे मिलेंगे।' उसने उसको इतनी ही दक्षिणा दी जितनी बड़े २ ऋत्विजों को दी गई। इस शस्त्र से पशु और स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इसलिये इसका पाठ किया जाता है ।(८) २५-अब दुरोहण का पाठ करता है। इसके लिये एक ब्राह्मण कही जा चुकी (४।२०)। जिसको पशु की कामना हो वह इन्द्र का सूक्त पढ़े। क्योंकि पशु इन्द्र के हैं। यह जगती छन्द में हो, क्योंकि पशु जागत (चलने वाले) हैं। यह महा- सूक्त होना चाहिये जिससे यजमान को बहुत से पशु मिल जायें। वरु ऋषि का सूक्त पढ़े (१०।९६ प्रतेमहे)। यह महा सूक्त भी है और जगती छन्द में भी है। प्रतिष्ठा की कामना हो तो इन्द्र वरुण का सूक्त पढ़े। क्योंकि यह होत्र उसी देवता का है। यह इन्द्र वरुण की प्रतिष्ठा है। यह जो इन्द्र-वरुण का याज्य है वह उसी अपनी ही प्रतिष्ठा में स्थित है। यह इन्द्र-वरुण का सूक्त निविद् के समान है इससे कामनायें पूरी हो जाती हैं। जब इन्द्र-वरुण का सूक्त दुरोहण के लिये चुने तो सुपर्ण ऋषि का चुने (८।३९ इमानि वां भागधेयानि...)। इससे इन्द्र-वरुण तथा सुपर्ण सम्बन्धी कामना एक साथ पूरी हो सकती है ।(९) २६-प्रश्न होता है कि दुरोहण के साथ छठे दिन के अहीन सूक्त पढ़े या न पढ़े ? इसका उत्तर यह है कि अवश्य पढ़े। जब और दिन पढ़ता है तो आज क्यों न पढ़े ! कुछ लोग कहते हैं कि न पढ़े। छठा दिन स्वर्ग लोक है। स्वर्ग लोक असमायी है अर्थात् सब इस को प्राप्त नहीं कर सकते (inaccessible)। स्वर्ग लोक में कोई विरला ही पहुँचता है। अगर दुरोहण के साथ में और सूक्त भी पढ़े