ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय
Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)
DevanagariSanskritpublished592 pages
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चौथा अध्याय ] ३९३ वरुण का याज्य कैसे पढ़े, अग्नि को कैसे छोड़ दे ? इसका उत्तर यह है कि अग्नि और वरुण तो एक ही हैं। ऋषि भी यही कहता है :— त्वमग्ने वरुणो जायसे ( ५।३।१ ) इसलिये इन्द्र और वरुण के याज्य में अग्नि छूटता नहीं । (१०) ऐतरेय ब्राह्मण की छठी पञ्चिका का चौथा अध्याय समाप्त हुआ ।