BharatKosha
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय

Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished592 pages

Page 468 of 592

Read in context
Page 468

४५४ [ सातवीं पञ्चिका गांधार से। इसका कथन अग्नि ने सनश्रुत अरिन्दम से किया, ऋतुविद् जानकि से, वशिष्ठ ने पैजवन सुदास से। वे सब इस प्रकार पान करके बड़े हो गये। ये सब महा- राजा थे। जो क्षत्रिय यजमान इस प्रकार पान करता है उसकी श्री सूर्य्य के समान चमकती है। सब दिशाओं से वह सूर्य्य के समान बलि† (कर) लेता है और उसका राज्य व्यथा-रहित हो जाता है। (८) ऐतरेय ब्राह्मण की सातवीं पञ्चिका का पाँचवाँ अध्याय समाप्त हुआ ऐतरेय ब्राह्मण की सातवीं पञ्चिका समाप्त हुई। †बलि का अर्थ है कर या महसूल! बलि का अर्थ मांस या पशु- वध नहीं है।