ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय
Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)
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Read in contextचौथा अध्याय १५—जो ऋत्विज इस रहस्य को समझता हुआ यह चाहे कि क्षत्रिय सब को जीत ले, सब लोकों को ले ले, और सब राजों में श्रेष्ठ और बड़ा हो जाय, साम्राज्य, भौज्य, स्वाराज्य, वैराज्य, पारमेष्ठ्य, राज्य, माहाराज्य, आधिपत्य, प्राप्त कर ले; सब जगह उसकी पहुँच हो, सब भूमि का मालिक हो, पूर्ण आयु वाला हो, और पृथिवी पर समुद्र तक राज्य करे और संशयरहित हो, उस ऋत्विज को चाहिये कि उस क्षत्रिय का इन्द्र के महाभिषेक की रीति से अभिषेक करे। और उससे यह शपथ ले कि "जिस रात्रि को तू पैदा हुआ उससे लेकर जिस रात्रि को तू मरेगा उस घड़ी तक जो कुछ तू ने लोक में सुकृत किया या आयु पाई या प्रजा मिली, उस सब को मैं छीन लूँगा अगर तू ने मुझसे द्रोह किया !" ( ४७८ )