ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
by महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय
Source: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (origin)
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Read in context४८६ [ आठवीं पञ्चिका को ग्रहण करके पृथ्वी भर का भ्रमण किया और उसे जीत कर राजा हो गया । वसिष्ठ गोत्री सत्यहव्य के पुत्र ने राजा से कहा, “तू ने समुद्र के तट तक सम्पूर्ण पृथ्वी जीत ली । अब तू मुझे भी ( दक्षिणा देकर ) बड़ा बना ।” अत्यराति ने उत्तर दिया, “हे ब्राह्मण, जब मैं उत्तर कुरुओं को जीत लूँगा तब तू पृथ्वी का राजा होगा और मैं तेरा सेनापति होऊँगा ।” सत्यहव्य के लड़के ने कहा, “यह देवक्षेत्र है । इसको कोई नहीं जीत सकता । तूने मुझे धोखा दिया . इस लिये मैं इसको तुझसे लिये लेता हूँ । जब अत्यराति से यह सब छीन लिया गया और वह निःशुक्र हो गया तो शिन्य के पुत्र शुष्मिण ने उसे मार डाला । इस लिये जो क्षत्रिय इस रहस्य को समझे और जिसका अभिषेक हो जाय उसको चाहिये कि ब्राह्मण से छल न करे । नहीं तो उसकी सम्पत्ति छिन जायगी और वह मार डाला जायगा । (९) ऐतरेय ब्राह्मण की आठवीं पञ्चिका का चौथा अध्याय समाप्त हुआ ।