अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
by पारम्परिक लोक संग्रह
Source: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (origin)
Page 24 of 292
Read in contextअकबर बीरबल बिनोद १० बादशाह का तोता । एक फकीर बड़ा तोते बाज था। वह तोता बाजार से खरीद कर लाता और उसे भली प्रकार शिक्षित कर अमीर उमरावों को देकर द्रव्य उपार्जन करता। एक दिन वह अपने नियम के अनुसार एक बहुत अच्छे तोते को खूब सिखा पढ़ा कर बादशाह को दिया। बादशाह तोते की खूबसूरती और इल्मियत से निहायत खुश हुआ और वह उसे एक सुविज्ञ सेवक को सुपुर्द कर उससे बोला—"देखो इस तोते की आब हवा और दाना पानी पर बड़ी सावधानी रखना, इसकी प्रकृति में कुछ अन्तर न पड़ने पावे। इसको जरा भी तकलीफ होते ही फौरन मुझे खबर देना। यदि कोई मेरे पास इसके मरने की खबर लायेगा तो तुरत उसकी गर्दन मार दी जायगी।" दैवात् तोता मर गया। बिचारा सेवक बहुत डरा, उसे अपने जीवनरक्षा की कोई सूरत नहीं दिखलाई पड़ती थी। दोनों प्रकारसे मृत्यु का सामना था। "कहने पर गर्दन मारी जावेगी और यदि मरने का समाचार न देकर गुप्त रक्खूँ तो किसी दिन भेद खुलने पर और भी दुर्गति होगी।" लाचार अपना कुछ वश न चलते देख बीरबल के पास गया और उससे सारा समाचार कहकर बहुत गिड़गिड़ाया और कष्ट से छुटकारा पाने की तरकीब पूछी। बीरबल बोला—"डरो नहीं, मैं तुमको अभयदान देता हूँ।" इधर नौकर को बिदा कर वह तुरत बादशाह के पास जा पहुँचा और