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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

by पारम्परिक लोक संग्रह

Source: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (origin)

DevanagariHindipublished292 pages

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अकबर बीरबल विनोद ७१ जबान से ही निर्णय हो गया । अब जवाहरातों को इसे देकर आप खाली पिटारी लेकर चला जा । इस प्रकार लुहार के हाथ खाली पिटारी लगी और कंजूस सानन्द जवाहरातों को लेकर घर लौटा ।

बीरबल और मदिरा

दरबार के समय में बादशाह को गप्प लड़ाने का मौका नहीं मिलता था इसकारण जनाने महल में ही गप लड़ा लिया करता था और इसी समय में आपस की गोष्ठी भी हो जाया करती थी। यह बात सब पर विदित थी जिस कारण बीरबल को जनाने महल में जाने की कोई मना ही नहीं थी। जब वार्तालाप करके बादशाह संतुष्ट हो जाता तो एक ऐसी नशीली चीज का सेवन करलेता जिससे कुछ समय पश्चात उसका चेहरा बदल जाता और बातें भी और की तौर करने लगता था। बीरबल नित्य बादशाह की ऐसी दशा देखा करता; परन्तु उसकी समझ में न आता कि दरअसल वह किस वस्तु का सेवन करता है। उस चीज के सेवन से बादशाह की स्मरणशक्ति बदल जाती । ऐसी दशा में बादशाह अनेक भूलें भी कर डालता था । एक दिन बीरबल के मन में उस वस्तु की जानकारी प्राप्त करने की सूझी। वह बीमारी का बहाना कर कई दिनों तक दरबार में नहीं आया। बादशाह ने एक दो दिन तो यह समझ कर कि साधारण बीमारी होगी, उसकी कुछ

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