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श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात

Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)

DevanagariHindipublished811 pages

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६ | विषयानुक्रमणिका

विषयपृष्ठ
बाधाओंको दूर करने हेतु संजीवनी लाकर भरतको जीवित करना३७
महाराज दशरथका मुनि मुद्गलसे रामके भविष्यका प्रश्न और उसका संतोषजनक उत्तर पाना३८
वृंदाका वृत्तांत और उसके द्वारा विष्णु भगवान्‌ के शापित होनेका इतिहास३६
सौराष्ट्रके एक निपुण ब्राह्मण तथा उसकी स्त्री कलहाका उपाख्यान४१
पञ्चम सर्ग
धर्मदत्त विप्र द्वारा कलहाका उद्धार४५
रामका सीताके साथ अयोध्यामें सानन्द निवास४८
रामकी संक्षिप्त दिनचर्या४९
महाराज दशरथका रामसे ज्ञानोपदेश सुनाने की प्रार्थना करना और रामका ज्ञानोपदेश देना५१
षष्ठ सर्ग
नारदका रामको देवताओंका संदेश सुनाना५१
राम-सीताका परस्पर वनगमनसम्बन्धी परामर्श५४
रामके राज्याभिषेककी तैयारी, गुरु वसिष्ठका रामके महलोंमें आना और उपदेश देना, अभिषेककी तैयारी देखकर मन्थराका दुःखित होना५५
मंथराका कैकेयीके पास जाकर उसे उत्तेजित करना और धरोहरस्वरूप रखे दोनों वरदान माँगनेको प्रेरित करना, तदनुसार कैकेयीका कोपभवनप्रवेश, राजा दशरथका उसके पास पहुँचना और वरदानकी बात सुनकर विकल होना, प्रातःकाल रामका पिताके पास जाकर धैर्य देना५६
कैकेयीके रामवनगमनसम्बन्धी वरदान मांगनेके समाचारसे पुरवासियोंकी व्याकुलता दूर करनेके लिए वामदेवको रामकी प्रतिज्ञा तथा नारदके आगमनकी बात बताना५७
राम-लक्ष्मण-सीताका वनगमन५७
प्रयाग होते हुए रामका चित्रकूट पहुँचना, जयंतकी कथा तथा दशरथमरण५८
भरतका ननिहालसे आकर पिताकी क्रिया करनेके बाद चित्रकूट जाना और रामके अनुरोधसे इनकी चरणपादुका लेकर अयोध्या लौटना६०
रामका अत्रिके आश्रमपर जाना६०
सप्तम सर्ग
रामके द्वारा विराधका वध६२
सुतीक्ष्णके आश्रमपर रामका जाना और वहाँसे अगस्त्यके आश्रमपर होते हुए पञ्चवटी पहुँचना, वहाँ जटायुसे मिलन और लक्ष्मणके हाथों शूर्पणखाके पुत्र साम्बका मरण६३
लक्ष्मणका शूर्पणखाके नाक-कान काटना६४
रामके हाथों खरदूषण-त्रिशिरा और उनकी चौदह हजार राक्षसी सेनाका निधन तथा शूर्पणखाका लंकामें रावणके पास जाना६५
सीताके अनुरोधसे रामका मृग मारीचके वधको जाना और रावण द्वारा सीताका हरण६७
जटायु-रावणयुद्ध, पञ्चवटीकी कुछ विशेष कथाएँ६८
राम-लक्ष्मणका लौटकर आश्रम पहुँचना, वहाँ मरणोन्मुख जटायुसे रावण द्वारा सीताहरणका वृत्तांत सुनना और रामका मृत जटायुकी अपने हाथों दाहक्रिया करना६९
सीताको व्यग्रतामय खोजते हुए रामको देखकर पार्वतीका वहाँ पहुँचना और उनके ईश्वरत्वकी परीक्षा करना, कबन्धवध और कबन्धकी जातकथा७१
रामका शबरीके आश्रमपर पहुँचना और शबरीको मुक्ति प्राप्त होना, वहाँसे रामका पम्पासरोवर जाना७१
अष्टम सर्ग
राम-सुग्रीवकी मित्रता और सुग्रीवका रामको अपना दुःख सुनाना७२
बालि-सुग्रीवयुद्ध और रामके हाथों बालिका मरण तथा रामका बालिको वरदान७५
रामका प्रवर्षण पर्वतपर निवास, कालांतरमें सुग्रीवको सीताकी खोजके विषयमें निश्चिन्त देखकर रामका लक्ष्मणको भेजना७१
सुग्रीवका बहुतेरे वानरोंको सीताको खोजने लिये भेजना और हनुमान्-अङ्गद आदिका एक तपस्विनीसे मिलना७७
अङ्गद आदिका सम्पातीसे मिलना और सम्पातीका अपना पूर्ववृत्तांत बताते हुए सीताके मिलनेका उपाय बताना७९
नवम सर्ग
हनुमान् द्वारा समुद्रलङ्घन और मार्गमें नागमाता सुरसासे साक्षात्कार७९
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