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श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात

Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)

DevanagariHindipublished811 pages

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३१२आनन्दरामायणे[ सर्गः ५

गन्धर्वेष्विह किन्नरेषु भुवि वा देवेषु देवालये पातालेष्वथ वा चतुर्मुखगृहे लोकेषु सर्व्वेषु च । अस्माभिश्चिरजीविभिश्चिरतरं दृष्टा दिशः सर्व्वतो न श्यायीदृशगीतवाद्यगरिमा नादर्शि नाश्श्रावि च ॥ ८३ ॥

एवं स्तुवद्भिरखिलैर्मुनिभिः प्रतिवासरम् । आसते सुखमेकांते वाल्मीकेराश्रमे चिरम् ॥ ८४ ॥ हेमकंकणमञ्जीरनूपुरैश्च विभूषितौ । केयूररशनाहारकुंडलैर्गतिशोभितौ ॥ ८५ ॥ निजक्रीडाकौतुकैश्च बालवाक्यैर्मनोहरैः । सीतां सुमेधां जनकं रञ्जयामासतुर्मुनिम् ॥ ८६ ॥

इति श्रीमत्कोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये विलासकाण्डे कुशलवजन्मकथनं नाम चतुर्थः सर्गः ॥ ४ ॥


पञ्चमः सर्गः

( रामरक्षा-महामंत्र )

विष्णुदास उवाच श्रीरामाश्रया प्रोक्तं कुशस्य चाभिमन्त्रणम् । कृतं तेनैव मुनिना पुरा तां मे प्रकाशय ॥ १ ॥ रामरक्षां वरां पुण्यां बालानां शान्तिकारिणीम् ।

इति शिष्यवचः श्रुत्वा रामदासोऽब्रवीद्वचः ॥ २ ॥

श्रीरामदास उवाच सम्यक् पृष्टं त्वया शिष्य रामरक्षाऽधुनोच्यते । या प्रोक्ता शम्भुना पूर्व्वं स्कंदार्थे गिरिजां प्रति ॥ ३ ॥

श्रीशिव उवाच देव्यद्य स्कंदपुत्राय रामरक्षामिमंत्रणम् । कुरु तारकघाताय समर्थोऽयं भविष्यति ॥ ४ ॥ इत्युक्त्वा कथयामास रामरक्षां शिवः प्रिये । नमस्कृत्य रामचन्द्रं शुचिर्भूत्वा जितेन्द्रियः ॥ ५ ॥


वीणाकी झनकारके साथ उत्तम रामचरित्र गाया करते थे ॥ ८१ ॥ जहाँ-तहाँ मुनियोंकी मण्डलीमें जब ये दोनों सुकुमार बालक रामचरित्रका गान करते थे तो सबके मुँहसे सहसा यह वाक्य निकल पड़ता था कि हम लोगोंने अपनी लम्बी आयुमें गंधर्वों, किन्नरों, मनुष्यों, देवताओं, पाताललोकवासियों, ब्रह्मलोकवासियों एवं सारे ब्रह्माण्डवासियोंके अनेक गायकोंके गायन सुने हैं लेकिन उनमें कहीं न तो मैंने इस प्रकार वाद्यकलाकी निपुणता देखी और न गायनमें ऐसी मिठास ही पायी । ८२ ॥ ८३ ॥ इस तरह सब ऋषियोंसे प्रशंसित होकर वे दोनों एकान्तमे वाल्मीकिके आश्रमपर रहा करते थे । सुवर्णके कङ्कण, नूपुर, केयूर, करधनी, हार तथा कुण्डल पहननेसे वे और भी सुन्दर दीखते थे । ८४ ॥ ८५ ॥ प्रतिदिन उनकी मनोहर बाललीला देख देखकर मुनि, सीता, सुमेधा और जनकजी मारे खुशीके फूले नही समाते थे । ८६ । इति श्रीमत्कोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये पं० रामतेजपाण्डेयकृतभाषाटीकासमन्विते जन्मकाण्डे चतुर्थः सर्गः ॥ ४ ॥

विष्णुदासने कहा है गुरुदेव ! जिस रामरक्षा-मंत्रसे वाल्मीकिने कुशका अभिमंत्रण किया था, उसे हमको बताइए ॥ १ ॥ क्योंकि मैने सुना है कि वह रामरक्षामंत्र बड़ा पवित्र सुन्दर और बालकोंको शान्ति प्रदान करनेवाला है । शिवजीने कहा-इस प्रकार शिष्यकी प्रार्थना सुनकर श्रीरामदास कहने लगे-हे प्रिय शिष्य ! तुमने बहुत अच्छा प्रश्न किया है मैं तुम्हें वह रामरक्षामन्त्र बतलाता हूँ, जिसे एक बार शिवजीने पार्वतीको स्वामिकार्तिकेयकी रक्षाके लिए बतलाया था ॥ २ ॥ ३ ॥ श्रीशिवजी बोले—हे देवि ! आज षडानन्दके