श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
by महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात
Source: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (origin)
Page 766 of 811
Read in contextसर्गः १७ ] मनोहरकाण्डम् ७५९
सप्तद्वीपेषु सर्वत्र धर्मशिक्षा मया कृता ।
इति राज्यकाण्डमुत्तरार्धम् ॥ ७ ॥
नारदोक्तं शतश्लोकैश्चरितं मम पावनम् ॥७८॥
पौराणामुपदेशश्च मन्मातृणां पराकृतः । मनःपूजा बहिःपूजा नरस्याश्वत्थसंभवम् ॥७९॥
रामलिंगतोभद्रार्णां नानाभेदा विचित्रिताः । मामनसख्या विस्तारः कथा स्वाराज्यसंभवा ॥८०॥
मम नामलेखनस्योद्यापनं दानविस्तरः । विप्रजीविवृत्तिविस्तारो वेदादीनां श्रुतेः फलम् ॥८१॥
सार्द्धमासद्वयं नाम ते व्रतं विधिविस्तरः । गौरीव्रतस्य विस्तारो दोलके मम पूजनम् ॥८२॥
नवम्यां मूर्तिदानं च मदनोत्सवविस्तरः । काम्यदेवतविभागे रकाद्यवर्णगे गुणः ॥८३॥
मम नाम्नश्च महिमा मन्नामार्थ उदाहृतः । चैत्रव्रतस्य विस्तारो रासभादिसतिः स्मृता ॥८४॥
अद्वैतं दर्शितं लोकान्नारीणां च समर्पणम् । मन्दुद्रावद्यमाहात्म्यं कवचं मे हनूमतः ॥८५॥
सीताया लक्ष्मणादीनां कवचानि पृथक् पृथक् । शीतलाव्रतमाहात्म्यं तस्य चोद्यापनं तथा ॥८६॥
रामनामतौभद्रं च मंत्राश्च कीर्तनाय च । पताकारोपणं नाम व्रतं मारुतिनोपदम् ॥८७॥
पयोपेड़िएमंतत्त्वे साररामायणं त्वयि । हनूमता शरसेतोर्ज्जुनस्यात्र खण्डनम् ॥८८॥
इति मनोहरकाण्डम् ॥ ८ ॥
वाल्मीकिना सोमवंशवृत्तान्तनिवेदनम् । पुत्रयोरभिषेकश्च प्रस्थानं हस्तिनापुरम् ॥८९॥
ततो महासंग्रामः पुत्रयोश्च जयो मम । ब्रह्मणा प्रार्थना मेऽत्र वाल्मीकेश्च कुशस्य च ॥९०॥
रिपुस्त्रीणां प्रार्थनया सीता पुत्र न्यवारयत् । ततो दिवेश्च वाक्येन वैकुण्ठ गन्तुमुद्यमः ॥९१॥
सोमवंशोद्भवापाय दत्तं वै हस्तिनापुरम् । आजमीढाऽभिषेकश्च भवतश्च विसर्जनम् ॥९२॥
कुशस्य गमनं स्वकीयपुरि राज्य क्षणाम मः, भपेरत्सुः कुमुदत्या राज्यगमनमुद्भवः ॥९३॥
की सन्धि, रामायणश्रवणका फल, मुसषक लिए जीवनदान, यमराअक साथ संग्राम, सप्तद्वीपमे सर्वत्र मेरी धर्मशिक्षाका प्रसार किया जाना, ॥ ७६॥ ७८ में इतना कथाये राज्यकाण्डके उत्तरार्धम वर्णित है ॥ ७ ॥ नारद द्वारा सौ श्लोकोंम मेर पावन चरितका वर्णन, पुरवासियोक लिए उपदेश दूसरों द्वारा अपनी माताओंके लिए उपदेश, मनःपूजा, बहिःपूजा, रामलिङ्गताभद्रक अनेक भेद, मामनसख्याका विस्तार, स्वाराज्यकी उत्पत्ति-की कथा, मेरे नामलेखनका उद्यापन, दाना विस्तार विज्जीजीविका विस्तार वेदके श्रवणका फल ॥७६-८१॥ ढाई महीनेके लिए व्रत, तिथिका विस्तार, गौरव्रतका विस्तार, दोलके मे मेरी पूजा, नवमीका मूर्तिदानकी विधि, मदनोत्सवका विस्तार, काम्य देवताओकर विस्तार, रकारादि अक्षरोंके गुणवर्णन मेर नामोकी महिमा, मेरे नामके लिए उदाहृत चत्रव्रतका विस्तार, राक्षसादि गतिगोका वर्णन, लागोंको अद्वैत स्वरूपका दर्शन, स्त्रियोंके लिए समर्पण, मेरो मुद्रा, मेरे नामस अद्भुत बन्धकी महिमा, हनुमत्कवचका वर्णन ॥८२-८५॥ राम, सीता, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्नकवच, शीतला व्रतका माहात्म्य, शीतला व्रतका उद्यापन, रामनामतौभद्र मंत्रका कार्तन, पताकारोहण और हनुमान्जीको प्रसन्न करनेवाले व्रतका वर्णन ॥ ८६ ॥ ८७ ॥ इस तरह मैने तुम्हें साररामायण सुना दिया । इसो रामायणके अन्तर्गत हनुमान्क द्वारा अर्जुनके शरसेतुके खण्डनकी की कथा वर्णित है॥ ८८ ॥ इतनी कथायें मनाहरकाण्डमें बतलायी गयी है॥ ८॥ वाल्मीकिवर्णित सोमवंशको राजाओंका वृत्तान्त, दोनों पुत्रांका अभिषेक, हस्तिनापुरक प्रस्थानका वर्णन, दोनों पुत्रोंके साथ मेरा महासंग्राम, मेरी विजय, ब्रह्माजीके द्वारा मेरी, वाल्मीकिकी तथा लवकुशकी स्तुति, रिपु-स्त्रियोंकी प्रार्थनासे सीताका अपन पुत्रोंको युद्ध करनेक रोकना, ब्रह्माके वाक्यसे मेरो वैकुण्ठगमनकी तैयारी, सोमवंशियोंके लिए हस्तिनापुरका राज्यदान, आजमीढ़का राज्याभिषेक, सब लागोंकी विदाई, ८९-६२ ॥ लवकुशका अपनी राजधानीमे पहुँचना और वहीं शासन करना, कुमुद्वतासे सन्तानोत्पत्ति, लक्ष्मण एवं सुग्रीव आदि वानरोंतथा