अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextवाले, जयशील एवं अपने बल से शत्रुओं की हिंसा करने वाले हैं. (३) सूक्त-९८ देवता—इंद्र इन्द्रो जयाति न परा जयाता अधिराजो राजसु राजयातै. चर्कृत्य ईड्यो वन्द्यश्चोपसद्यो नमस्यो भवेह.. (१) इस संग्राम में इस राजा की सहायता के लिए आए हुए इंद्र विजयी हों. वह किसी से पराजित न हों. सभी राजाओं के स्वामी इंद्र इन राजाओं में सुशोभित हों. शत्रुओं को अत्यधिक काटने वाले ये स्तुत्य एवं वंदनीय हैं. हे सब के द्वारा सेवा करने योग्य इंद्र! तुम इस संग्राम में हमारे द्वारा पूजित बनो. (१) त्वमिन्द्राधिराजः श्रवस्युस्त्वं भूरभिभूतिर्जनानाम्. त्वं दैवीर्विश इमा वि राजायुष्मत् क्षत्रमजरं ते अस्तु.. (२) हे इंद्र! तुम राजाओं के राजा एवं यशस्वी हो. तुम अपने तेज से सभी प्राणियों को पराजित करते हो. ये देव संबंधिनी प्रजाएं तुम्हें शोभा देती है. हे राजन्! तुम्हारा बल चिरकाल तक जीवन से युक्त एवं वृद्धावस्था से विहीन हो. (२) प्राच्या दिशस्त्वमिन्द्रासि राजोतोदीच्या दिशो वृत्रहञ्छत्रुहोऽसि. यत्र यन्ति स्रोत्यास्तज्जितं ते दक्षिणतो वृषभ एषि हव्यः.. (३) हे इंद्र! तुम पूर्व दिशा के राजा हो. हे वृत्र राक्षस को मारने वाले इंद्र! तुम उत्तर दिशा के भी स्वामी तथा शत्रुओं के हंता हो. हमारी इच्छाएं पूर्ण करने वाले तुम हमारे द्वारा बुलाए जाने पर युद्ध के समय हमारे दक्षिण भाग में वर्तमान रहो. (३) पालनकर्ता इंद्र की भुजाएं हम अपने चारों ओर धारण करते हैं, वे सब ओर से हमारी रक्षा करें. हे सब के प्रेरक और राजा सोमदेव! मुझे संग्राम में कष्ट न होने वाला और शोभन विजयवाला बनाओ. (४) सूक्त-९९ देवता—इंद्र अभि त्वेन्द्र वरिमतः पुरा त्वांहूरणाद्धुवे. ह्वयाम्युग्रं चेत्तारं पुरुणामानमेकजम्.. (१) हे इंद्र! विस्तीर्ण शरीर के कारण मैं तुझे संग्रामों में बुला रहा हूं. मैं संग्राम में पराजय से बचने के लिए तुम्हारा आह्वान पहले ही करता हूं. हे इंद्र! तुम अत्यधिक शक्तिशाली, जय के उपाय जानने वाले, अनेक शत्रुओं को जीतने वाले एवं अकेले ही युद्ध जीतने वाले हो. (१) ebook converter DEMO Watermarks*