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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

प्रारंभिक पृष्ठ व विषय-सूची

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अथर्ववेद डा. गंगा सहाय शर्मा एम. ए., (हिंदी-संस्कृत), पी-एच. डी., व्याकरणाचार्य संस्कृत साहित्य प्रकाशन नई दिल्ली ebook converter DEMO Watermarks*

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© संस्कृत साहित्य प्रकाशन संस्करण : २०१५ ISBN 81-87164-97-2 वि. प्र.- 535.5H15* संस्कृत साहित्य प्रकाशन के लिए विश्व बुक्स प्रा. लि. एम-१२, कनाट सरकस, नई दिल्ली-११०००१ द्वारा वितरित ebook converter DEMO Watermarks*

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भूमिका महाभाष्य के रचयिता महर्षि पतंजलि ने अथर्ववेद की नौ संहिताओं का उल्लेख किया है— नवधाऽथर्वाणोवेदः. इस का तात्पर्य यह है कि पतंजलि के समय अथर्ववेद की नौ संहिताएं उपलब्ध थीं. पतंजलि का समय २०० ईसा पूर्व से १५० ईसा पूर्व तक माना जाता है. इन संहिताओं के नाम इस प्रकार हैं— (१) पिप्लाद, (२) स्तोद अथवा तोद, (३) मोद, (४) शौनकीय, (५) जावल, (६) जलद, (७) ब्रह्मदेव (८) देवदर्श (९) चारणवैद्य. आजकल तीन संहिताएं उपलब्ध हैं—पिप्लाद, मोद और शौनक. इन में शौनक संहिता का आजकल बहुत प्रचार है. मैं ने जो अनुवाद प्रस्तुत किया है, उस का आधार शौनक संहिता ही है. शौनक संहिता में २० कांड, ७३१ सूक्त तथा ५९८७ मंत्र हैं. अथर्ववेद की शौनक संहिता के कांडों की स्थिति इस प्रकार है— आरंभ के सात कांडों में छोटेछोटे सूक्त हैं. प्रथम कांड के प्रत्येक सूक्त में ४ मंत्र, द्वितीय कांड के प्रत्येक सूक्त में ५ मंत्र, तृतीय कांड के प्रत्येक सूक्त में ६ मंत्र, चतुर्थ कांड के प्रत्येक सूक्त में ७ मंत्र तथा पंचम कांड के प्रत्येक सूक्त में ८ मंत्र हैं. षष्ठ कांड में १४२ सूक्त हैं और प्रत्येक सूक्त में कम से कम तीन मंत्र हैं. सप्तम कांड में ११८ सूक्त हैं. इन में अधिकांश सूक्त एक अथवा दो मंत्रों वाले हैं. आठवें से ले कर बारहवें कांड तक अधिक मंत्रों वाले बड़े सूक्त हैं. तेरहवें से अठारहवें कांड तक भी अधिक मंत्रों वाले सूक्त हैं. सत्रहवें कांड में ३० मंत्रों का केवल एक सूक्त है. उन्नीसवें कांड में ७२ सूक्त हैं और बीसवें कांड में १४३ सूक्त हैं. अथर्ववेद में ऋग्वेद से लिए गए मंत्रों की संख्या १२०० है. ऋग्वेद की विषय वस्तु डा. उमाशंकर शर्मा ऋषि ने अपने 'संस्कृत साहित्य का इतिहास' में अथर्ववेद की विषय वस्तु का वर्णन करते हुए लिखा है— “प्रथम कांड में विविध रोगों की निवृत्ति, बंधन से मुक्ति, राक्षसों का विनाश, सुख प्राप्ति आदि का निरूपण है. द्वितीय कांड में रोग, शत्रु एवं कृमिनाश तथा दीर्घायुष्य की प्रार्थना है. तृतीय कांड में शत्रुसेना का सम्मोहन, राजा का ebook converter DEMO Watermarks*

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निर्वाचन, शाला निर्माण, कृषि तथा पशु पालन का विवरण है. चतुर्थ कांड में ब्रह्मविद्या, विषनाशन, राज्याभिषेक, वृष्टि, पापमोचन तथा ब्रह्मोदन का वर्णन है. पंचम कांड में मुख्यत ब्रह्म विद्या और कृत्या राक्षसी के परिहार से संबद्ध मंत्र हैं. षष्ठ कांड में दुःस्वप्ननाशन और अन्न समृद्धि के मंत्र हैं. सप्तम कांड आत्मा का वर्णन करता है. अष्टम कांड में मुख्यतया विराट् ब्रह्म का वर्णन है. नवम कांड में मधु विद्या, पंचोदन, अज, अतिथि सत्कार, गो महिमा एवं यक्ष्मा का नाश—ये विषय हैं. दशम कांड में कृत्या निवारण, ब्रह्मविद्या, शत्रु नाश के लिए वरणमणि, सर्पविषनाशन एवं ज्येष्ठ विषनाशन का वर्णन है. एकादश कांड में ब्रह्मोदन, रुद्र तथा ब्रह्मचर्य का वर्णन है. द्वादश कांड में प्रसिद्ध पृथ्वी सूक्त है, जिस में भूमि का महत्त्व वर्णित है. त्रयोदश कांड में पूर्णतयाः अध्यात्म का प्रकरण है. चतुर्दश कांड में विवाह संस्कार से संबद्ध कार्यों का वर्णन है. पंचदश कांड में व्रात्य ब्रह्म का गद्य में वर्णन है. षोडश कांड में दुःखमोचन के लिए गद्यात्मक मंत्र हैं. सप्तदश कांड में अभ्युदय के लिए प्रार्थना है. अष्टादश कांड पितृमेध से संबद्ध है. एकोनविंश कांड में विविध विषय हैं—यक्ष, नक्षत्र, विविध मणियां, छंदों के नाम, राष्ट्र का वर्णन, काल का महत्त्व. विंश कांड में सोमयाग का वर्णन तथा इंद्र की स्तुति है. इस के अंत में 10 सूक्त ‘कुंताय सूक्त’ के नाम से प्रसिद्ध हैं. अथर्ववेद का महत्त्व अथर्ववेद की विषयवस्तु शेष तीनों वेदों—ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद से भिन्न है. इन तीनों वेदों में यज्ञों, देवस्तुतियों, स्वर्ग प्राप्ति आदि को महत्त्व दिया गया है. इस के विपरीत अथर्ववेद में वर्णित ओषधियां, जादू, टोनाटोटका आदि लौकिक जीवन से संबंधित हैं. बहुत समय तक तीन वेदों की मान्यता रही थी. इस विषय में एक सूक्ति प्रस्तुत है— त्रयोऽग्न्यस्त्रययो वेदास्त्रयोदेवास्त्रयोगुणाः त्रयो दंडि प्रबंधश्च त्रिषुलोकेषुविश्रुताः.. अर्थात तीन अग्नियां, तीन वेद, तीन गुण और दंडी कवि के तीन प्रबंध-तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं. अथर्ववेद की भाषा भी शेष तीन वेदों की भाषा से सरल है. इन दृष्टियों से स्पष्ट होता है कि अथर्ववेद की रचना बाद में हुई है. वैसे यज्ञों में अथर्ववेद को विशेष महत्त्व प्राप्त है. यज्ञ में चार वेदों से संबंधित चार ऋत्विज होते हैं. उन में प्रधान ऋत्विज् ब्रह्मा कहलाता है. वह अपनी देखरेख में यज्ञ कार्य कराता है और शेष ऋत्विजों को निर्देश देता है. ब्रह्मा एक प्रकार से यज्ञ का अध्यक्ष अथवा प्रधान होता है. यह ब्रह्मा अथर्ववेद का ही ज्ञाता होता है. आचार्य बलदेव प्रसाद उपाध्याय के अनुसार— अथर्ववेद का विषय विवेचन अन्य वेदों की अपेक्षा नितांत विलक्षण है. इस में वर्णित विषयों का तीन प्रकार से विभाजन किया जा ebook converter DEMO Watermarks*

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सकता है— (१) अध्यात्म (२) अधिभूत और (३) अधिदैवत. उन के अनुसार अथर्ववेद के सूक्तों का विषयगत विभाजन निम्नलिखित है— (१) भैषज्य सूक्त—इन सूक्तों में रोगों की चिकित्सा और ओषधियों का वर्णन है. (२) आयुष्य सूक्त—इन सूक्तों में दीर्घ आयु के लिए प्रार्थना की गई है. (३) पौष्टिक सूक्त—इन सूक्तों में घर बनाने, हल जोतने, बीज बोने, अनाज उत्पन्न करने आदि का वर्णन है. (४) प्रायश्चित सूक्त—इन सूक्तों में अनेक प्रकार के पाप और निषिद्ध कर्मों के प्रायश्चित का वर्णन है. (५) स्त्रीकर्म सूक्त—ये सूक्त विवाह तथा प्रेम से संबंधित हैं. (६) राजकर्म सूक्त—इन सूक्तों का संबंध राजाओं और उन के कार्यों से है. अथर्ववेद का विशेष सूक्त अथर्ववेद का विशेष सूक्त ‘पृथ्वी सूक्त’ है. इस सूक्त में पृथ्वी को ‘माता’ कहा गया है. इस के एक मंत्र का अंश है— माता पृथिवी पुत्रो ऽ हं पृथिव्याः. अर्थात पृथ्वी मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूं. यह भावना शेष तीनों वेदों में से किसी में नहीं है. जहां तक संभव हुआ है, मैं ने सरल भाषा में अथर्ववेद के मंत्रों का आचार्य सायण के भाष्य के आधार पर अनुवाद किया है. —गंगा सहाय शर्मा

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अनुक्रम

पहला कांड दूसरा कांड तीसरा कांड चौथा कांड पांचवां कांड छठा कांड सातवां कांड आठवां कांड नौवां कांड दसवां कांड ग्यारहवां कांड बारहवां कांड तेरहवां कांड चौदहवां कांड पंद्रहवां कांड सोलहवां कांड सत्रहवां कांड अठारहवां कांड उन्नीसवां कांड बीसवां कांड ebook converter DEMO Watermarks*

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पहला कांड सूक्त विषय मंत्र १. वाणी के स्वामी ब्रह्म देव की स्तुति १-४ २. पर्जन्य अर्थात् बादल तथा पृथ्वी का वर्णन १, २, ४ इंद्र की स्तुति ३ ३. पर्जन्य, वरुण, चंद्र व सूर्य का वर्णन १-९ ४. जल देवता की स्तुति १-४ ५. जल का ओषधि के रूप में वर्णन १-४ ६. जल संसार का कल्याणकारी तत्त्व १-४ ७. अग्नि और इंद्र की शक्ति का वर्णन १-७ ८. बृहस्पति, अग्नि एवं सोम से शत्रुओं को दंडित करने का आग्रह १-४ ९. वसु, इंद्र, पूषा, वरुण, मित्र, अग्नि एवं विश्वे देव से धन संपत्ति की कामना १-४ १०. वरुण से जलोदर रोग से मुक्ति की कामना १-४ ११. प्रसव देव पूषा से प्रसव वेदना से छुटकारा पाने का अनुरोध १-६ १२. विभिन्न रोगों से छुटकारा पाने के लिए सूर्य की चरू आदि से प्रशंसा १-४ १३. पर्जन्य की स्तुति १-४ १४. यम और सोम की प्रशंसा १-४ १५. सिंधु, पवन आदि की प्रशंसा १-४ १६. अग्नि और वरुण देव से चोरों का संहार करने का अनुरोध १-४ १७. स्त्री की रक्त प्रवाहिनी का वर्णन १-४ १८. सविता, वरुण मित्र, अर्यमा आदि देवों की स्तुति १-४ १९. इंद्र आदि देवों को शत्रुओं से रक्षा करने का आग्रह १-४ २०. सोम, इंद्र और वरुण देव से शत्रुओं द्वारा छोड़े गए आयुधों को निष्काम करने का आग्रह १-४ २१. इंद्र देव से शत्रुओं का विनाश करने के लिए आग्रह १-४ २२. हृदय रोग निवारण हेतु सूर्य देव की स्तुति १-४ २३. हरिद्रा, इंद्रावारुणि आदि ओषधि का वर्णन १-४ ebook converter DEMO Watermarks*

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२४. आसुरी माया से उत्पन्न वनस्पति का वर्णन १-४ २५. यक्ष्मा नाशक अग्नि की स्तुति १-४ २६. इंद्र, मरुत् व पर्जन्य देव की स्तुति १-४ २७. शत्रु सेना को पराजित और अपनी सेना को आगे बढ़ाने के लिए इंद्र पत्नी की स्तुति १-४ २८. अग्नि देव की स्तुति १-४ २९. ब्रह्मणस्पति देव की स्तुति १-६ ३०. विश्वे देव, आदित्य एवं वसु की स्तुति १-४ ३१. इंद्र, यम आदि चार देवों के लिए मंत्रों की आहुति १-४ देव कुबेर से स्वर्ण व रजत आदि धन देने का आग्रह ४ ३२. पृथ्वी और आकाश को नमन १-४ ३३. रोग विनाशक जल देव की स्तुति १-४ ३४. मधु लता का वर्णन १-५ ३५. हिरण्य का वर्णन १-४ दूसरा कांड सूक्त विषय मंत्र १. ब्रह्म और आत्मा का वर्णन १-५ २. ब्रह्म के रूप में सूर्य की आराधना १-५ ३. स्राव विरोधी ओषधि का वर्णन १-६ ४. जंगिड़ वृक्ष से निर्मित जंगिड़ मणि का वर्णन १-६ ५. इंद्र की स्तुति १-७ ६. अग्नि देव की स्तुति १-५ ७. पाप का विनाश करने वाली मणि का गुणगान १-५ ८. यक्ष्मा और कुष्ठ रोगों से मुक्त करने वाले तारे १-५ ९. वनस्पतियों से निर्मित मणि का वर्णन १-५ १०. द्यावा और पृथ्वी का विभिन्न रोगों में कल्याणकारी होना १-८ ११. तिलक वृक्ष से निर्मित मणि १-५ १२. द्यावा, पृथ्वी और अंतरिक्ष के अधिपति देव क्रमशः अग्नि, वायु और सूर्य का वर्णन १-८ १३. अग्नि, बृहस्पति और विश्वे देव का गुणगान १-५ १४. अग्नि, भूतपति तथा इंद्र की स्तुति १-६ ebook converter DEMO Watermarks*

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१५. प्राणों को बल प्रदान करना १-६ १६. प्राण और अपान से मृत्यु से रक्षा के लिए प्रार्थना १-५ द्यावा और पृथ्वी की स्तुति २ १७. अग्नि की ओज के रूप में स्तुति १-७ १८. अग्नि देव से शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना १-५ १९. अग्नि देव की स्तुति १-५ २०. वायु देव की स्तुति १-५ २१. सूर्य देव की स्तुति १-५ २२. चंद्र देव की स्तुति १-५ २३. जल देव की स्तुति १-५ २४. राक्षसों के स्वामी से अनुरोध १-८ २५. रोग को पराजित करने वाली जड़ी पृश्निपर्णी का वर्णन १-५ २६. सविता देवता की प्रशंसा १-५ २७. ग्वारपाठा नामक जड़ी का वर्णन १-७ २८. अग्नि देव की स्तुति १-५ २९. अग्नि, सूर्य और इंद्र की स्तुति १-७ ३०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-५ ३१. मही देवता द्वारा कीटाणुओं का नाश १-५ ३२. सूर्य की किरणों द्वारा कीटाणुओं का नाश १-६ ३३. यक्ष्मा रोग का विनाश १-७ ३४. विश्वकर्मा की स्तुति १-५ ३५. विश्वकर्मा की स्तुति १-५ ३६. अग्नि, सोम व वरुण की स्तुति १-८ तीसरा कांड सूक्त विषय मंत्र १. अग्नि, मरुत् व इंद्र देव की स्तुति १-६ २. अग्नि, इंद्र और मरुत् से शत्रुओं का विनाश करने का अनुरोध १-६ ३. अग्नि की स्तुति १-६ ४. इंद्र देव से राजा, राज्य पुनः प्राप्त होना १-७ ५. ओषधियों की सार रूप पर्णमणि का वर्णन १-८ ebook converter DEMO Watermarks*

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६. अश्वत्थ मणि की स्तुति १-८ ७. हिरण के सिर में सींग की रोग निवारक ओषधि का वर्णन १-७ ८. मित्र आदि देवों से आयु को दीर्घ करने का अनुरोध १-६ सविता, त्वष्टा, इंद्र आदि देवों की स्तुति २ सोम, सविता आदि देवताओं का आह्वान ३ ९. पशुओं से सुरक्षा के लिए देवों से प्रार्थना १-६ १०. एकाष्टका उषा की स्तुति १-१३ ११. इंद्र और अग्नि देव से यक्ष्मा रोग से मुक्ति की प्रार्थना १-८ १२. शाला, वास्तोष्पति का वर्णन १-९ इंद्र और बृहस्पति से शाला के निर्माण का निवेदन ४ १३. सिंधु और जल का वर्णन १-७ १४. गायों का वंश बढ़ाने के लिए स्तुति १-६ १५. व्यापार से लाभ की कामना के लिए इंद्र व अग्नि देव की स्तुति १-८ १६. अग्नि, इंद्र, मित्र, वरुण आदि की प्रशंसा १-७ १७. खेती बढ़ाने के लिए इंद्र, सूर्य, वायु आदि देवों की प्रशंसा १-९ १८. पाठा जड़ीबूटी का वर्णन १-६ १९. पुरोहित द्वारा राजा की जय की कामना १-८ २०. अग्नि की स्तुति १-१० २१. अग्नि की स्तुति १-१० २२. इंद्र, वरुण आदि से बल की प्रार्थना १-६ २३. पुत्र प्राप्ति की कामना १-६ २४. वनस्पति की प्रशंसा १-७ २५. काम देव की प्रशंसा १-६ मित्र वरुण की स्तुति ६ २६. गंधर्वों की स्तुति १-६ २७. दिशाओं की स्तुति १-६ २८. जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली गाय का वर्णन १-६ २९. सफेद पैरों वाली भेड़ की महत्ता का वर्णन १-८ ३०. सौमनस्य कर्म की विशेषताएं १-७ ३१. अश्विनीकुमारों, इंद्र, वायु आदि की स्तुति १-११ ebook converter DEMO Watermarks*

सूक्त विषय मंत्र

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चौथा कांड सूक्त विषय मंत्र १. बृहस्पति आदि देवों की स्तुति १-७ २. प्रजापति की प्रशंसा १-८ ३. बाघ, चोरमनुष्य और भेड़िए से बचाव की कामना १-७ ४. वनस्पति व जड़ीबूटियों का वर्णन १-८ ५. स्वप्न के देव की प्रशंसा १-७ ६. तक्षक की उत्पत्ति का वर्णन १-८ विष का वर्णन ३ ७. विषहारी वारण वृक्ष का वर्णन १-७ विषमूलक जड़ीबूटी का वर्णन १-६ ८. जल का वर्णन १-७ ९. अंजन मणि की महिमा का वर्णन १-१० १०. शंख मणि का वर्णन १-७ ११. इंद्र के रूप में अनड्वान अर्थात् बैल का वर्णन १-१२ १२. रोहिणी वनस्पति का वर्णन १-७ १३. वायु और इंद्र की स्तुति १-७ १४. यज्ञ की महिमा १-९ १५. वर्षा देव की स्तुति १-१६ १६. वरुण देव की प्रशंसा १-९ १७. सहदेवी व अपामार्ग वनस्पति का वर्णन १-८ १८. सहदेवी व अपामार्ग जड़ी का वर्णन १-८ १९. सहदेवी व अपामार्ग ओषधि का वर्णन १-८ २०. सदा पुष्पा नाम की जड़ीबूटी का वर्णन १-९ २१. गायों की महिमा का वर्णन १-७ २२. इंद्र व क्षत्रिय राजा की स्तुति १-७ २३. अग्नि देव की स्तुति १-७ २४. इंद्र देव की स्तुति १-७ २५. वायु और सविता देव की स्तुति १-७ २६. द्यावा पृथ्वी की स्तुति १-७ २७. मरुत् की स्तुति १-७ २८. भव और शर्व की स्तुति १-७ २९. मित्र और वरुण देव की प्रशंसा १-७ ३०. ब्रह्मवादिनी पुत्री वाक् का वर्णन १-८ ebook converter DEMO Watermarks*

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३१. क्रोध के अभिमानी देव मन्यु का वर्णन १-७ ३२. मन्यु की स्तुति १-७ ३३. अग्नि देव की स्तुति १-८ ३४. ब्रह्मोदन की स्तुति १-८ ३५. प्राणियों के निर्माणकर्ता देवों का वर्णन १-७ ३६. सत्य एवं ओज वाले अग्नि देव की स्तुति १-१० ३७. विभिन्न जड़ीबूटियों का वर्णन १-१२ ३८. अप्सराओं द्वारा अक्षशलाका की स्तुति १-७ ३९. अग्नि, वायु, सूर्य आदि की प्रशंसा १-१० ४०. जातवेद अग्नि की स्तुति १-८ पांचवां कांड सूक्त विषय मंत्र १. वरुण की स्तुति १-९ २. इंद्र की महिमा का वर्णन १-९ ३. अग्नि देव की प्रशंसा १-११ भारती, सरस्वती और पृथ्वी की स्तुति ७ इंद्र की स्तुति ८ ४. कुष्ठ ओषधि का वर्णन १-१० ५. लाख ओषधि का वर्णन १-९ ६. ब्रह्म की स्तुति १-१४ सूर्य की स्तुति ४ अग्नि की स्तुति ११ ७. अराति की स्तुति १-१० ८. अग्नि देव से यज्ञ में सभी देवों को लाने का आग्रह १-९ इंद्र को यज्ञ में आने का निमंत्रण २ अन्य देवों से यज्ञ में आने का आग्रह ३ इंद्र से शत्रुओं को मारने का आग्रह ९ ९. पृथ्वी, स्वर्ग और आकाश से प्रार्थना १-८ १०. पत्थर से बने घर की स्तुति १-८ चंद्रमा, वायु, सूर्य, अंतरिक्ष और पृथ्वी की स्तुति ८ ११. वरुण देव की स्तुति १-११ १२. अग्नि की स्तुति १-११ १३. सर्पविषनाशन वर्णन १-११

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१४. ओषधि से प्रार्थना १-१३ १५. मधुला ओषधि का वर्णन १-११ १६. लवण को संतानोत्पत्ति के लिए उत्साहित करना १-११ १७. ब्रह्मजाया का वर्णन १-१८ १८. ब्राह्मण की गाय का वर्णन १-१५ १९. ब्राह्मणों के साथ बुरे व्यवहार के फल का वर्णन १-१५ २०. दुंदुभि की महिमा का वर्णन १-१२ २१. दुंदुभि की महिमा का वर्णन १-१२ २२. देह को नष्ट कर देने वाले ज्वर का वर्णन १-१४ २३. इंद्र की स्तुति १-१३ २४. सविता, अग्नि, द्यावा और पृथ्वी, वरुण, मित्र, वायु देव, चंद्रमा आदि की स्तुति १-१७ २५. अग्नि, वरुण, मित्र आदि की स्तुति १-१३ २६. अग्नि, सविता देव, इंद्र व अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१२ २७. अग्नि सभी देवों में श्रेष्ठ १-१२ २८. उषा देवी, आदित्य आदि का वर्णन १-१४ २९. जातवेद अग्नि देव की स्तुति १-१५ ३०. यम, आयु और अग्नि से प्रार्थना १-१७ ३१. कृत्या का प्रतिहरण १-१२ छठा कांड सूक्त विषय मंत्र १. सविता देव की स्तुति १-३ २. इंद्र के लिए सोमरस का प्रबंध १-३ ३. इंद्र और पूषा देव की स्तुति १-३ ४. त्वष्टा की स्तुति १-३ अदिति की स्तुति २ अश्विनीकुमारों की स्तुति ३ ५. अग्नि और इंद्र की स्तुति १-३ ६. ब्रह्मणस्पति व सोम की प्रशंसा १-३ ७. सोम से कल्याण की याचना १-३ ८. कामात्मा का वर्णन १-३ ९. कामात्मा का वर्णन १-३ ebook converter DEMO Watermarks*

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१०. अग्नि और वायु की स्तुति १-३ ११. पुंसवन कर्म का वर्णन १-३ १२. विष निवारण वर्णन १-३ १३. मृत्यु की स्तुति १-३ १४. श्लेष्मा रोग का निवारण १-३ १५. वनस्पतियों में उत्तम पलाश वृक्ष का वर्णन १-३ १६. खाई जाने वाली सरसों का वर्णन १-४ १७. नारी के गर्भ में स्थित रहने की कामना १-४ १८. ईर्ष्या विनाशन १-३ १९. देवों से शुद्धि के लिए प्रार्थना १-३ २०. प्रबल पित्त ज्वर से छुटकारे की कामना १-३ २१. धनवती ओषधियों का वर्णन १-३ २२. आदित्य, रश्मि व मरुत् की स्तुति १-३ २३. जल की प्रशंसा १-३ २४. जल का वर्णन १-३ २५. मन्युविनाशन १-३ २६. पाप्मा की स्तुति १-३ २७. यम की पूजा अर्चना १-३ २८. यम की प्रशंसा १-३ २९. यम की स्तुति १-३ ३०. जौ सौभाग्य सूचक शमी का वर्णन १-३ ३१. गौ अर्थात् सूर्य की किरणों का वर्णन १-३ ३२. अग्नि की स्तुति १-३ ३३. इंद्र की स्तुति १-३ ३४. अग्नि की स्तुति १-५ ३५. वैश्वानर अग्नि की स्तुति १-३ ३६. वैश्वानर अग्नि की आराधना १-३ ३७. इंद्र की स्तुति १-३ ३८. तेजस्वरूपा देवी की स्तुति १-४ ३९. इंद्र की स्तुति १-३ ४०. द्यावा, पृथ्वी व इंद्र की आराधना १-३ ४१. प्राण के अधिष्ठाता देव एवं दिव्यगुणों की प्रशंसा १-३ ४२. पुरुष के लिए उपदेश १-३ ४३. क्रोध को शांत करना १-३ ४४. गाय के सींग द्वारा विषाण रोग का इलाज १-३ ebook converter DEMO Watermarks*

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४५. दुःस्वप्न का विनाश १-३ ४६. दुःस्वप्न का विनाश १-३ ४७. अग्नि की स्तुति १-३ ४८. सवन नामक यज्ञ का उल्लेख १-३ ४९. अग्नि की स्तुति १-३ ५०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-३ ५१. वरुण देव की स्तुति १-३ ५२. सूर्य देव की स्तुति १-३ ५३. पृथ्वी आदि की स्तुति १-३ ५४. इंद्र, अग्नि और सोम की स्तुति १-३ ५५. छह ऋतुओं के अधिष्ठाता देवों की प्रशंसा १-३ ५६. विश्वे देव और रुद्र की स्तुति १-३ ५७. रोग की ओषधि का वर्णन १-३ ५८. इंद्र, सविता, अग्नि, सोम आदि की प्रशंसा १-३ ५९. सहदेवी नामक ओषधि का वर्णन १-३ ६०. अर्यमा देव की स्तुति १-३ ६१. जल के अधिष्ठाता देव की स्तुति १-३ ६२. वैश्वानर अग्नि की स्तुति १-३ ६३. अनिष्टकारिणी देवी निर्ऋति का वर्णन १-४ ६४. सोमनस्य के इच्छुक जनों को उपदेश १-३ ६५. इंद्र की स्तुति १-३ ६६. इंद्र की स्तुति १-३ ६७. इंद्र की स्तुति १-३ ६८. सविता देव व माता अदिति की प्रशंसा १-३ ६९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-३ ७०. प्रेम बंधन का वर्णन १-३ ७१. अग्नि की प्रशंसा १-३ ७२. अर्क मणि का वर्णन १-३ ७३. वरुण देव की स्तुति १-३ ७४. ब्रह्मणस्पति देव की स्तुति १-३ ७५. इंद्र की स्तुति १-३ ७६. सायंतन अग्नि की स्तुति १-४ ७७. जातवेद अग्नि की प्रशंसा १-३ ७८. अग्नि देव की प्रशंसा १-३ ७९. अंतरिक्ष के पालनकर्ता अग्नि की प्रशंसा १-३ ebook converter DEMO Watermarks*

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८०. अग्नि की स्तुति १-३ ८१. अग्नि की स्तुति १-३ ८२. इंद्र की प्रशंसा १-३ ८३. सूर्य द्वारा गंडमालाओं की चिकित्सा १-४ ८४. निर्ऋति का वर्णन १-४ ८५. वरण मणि द्वारा राजयक्ष्मा रोग का निवारण १-३ ८६. इंद्र की स्तुति १-३ ८७. अच्छे राजा की कामना १-३ ८८. अच्छे राज्य के लिए वरुण, बृहस्पति और सूर्य की प्रशंसा १-३ ८९. वरुण, सरस्वती, आदि की पतिपत्नी मिलन के लिए प्रशंसा १-३ ९०. रुद्र देव की प्रशंसा १-३ ९१. यक्ष्मा रोग का विनाश १-३ ९२. वेगवान अश्व की प्रशंसा १-३ ९३. यम आदि की प्रशंसा १-३ ९४. सरस्वती देवी की आराधना १-३ ९५. कूठ वनस्पति का वर्णन १-३ ९६. वनस्पतियों के देव राजा सोम की प्रशंसा १-३ ९७. मेधावी मित्र और वरुण का वर्णन १-३ ९८. इंद्र की स्तुति १-४ ९९. इंद्र की स्तुति १-३ १००. इड़ा, सरस्वती और भारती द्वारा विष विनाशक ओषधि प्रदान करना १-३ १०१. पुरुष को गर्भाधान करने में समर्थ होने का आशीर्वाद १-३ १०२. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-३ १०३. बृहस्पति देव की आराधना १-२ १०४. इंद्र और अग्नि की प्रशंसा १-३ १०५. खांसी रोग से मुक्ति की कामना १-३ १०६. अग्निशाला की स्तुति १-३ १०७. विश्वजित देव की स्तुति १-४ १०८. मेधा देवी और अग्नि की आराधना १-५ १०९. पिप्पली ओषधि का वर्णन १-३ ११०. अग्नि देव की स्तुति १-३ १११. अग्नि की स्तुति १-४ ebook converter DEMO Watermarks*

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११२. अग्नि की स्तुति १-३ ११३. पूषा देव की स्तुति १-३ ११४. अग्नि और अदिति पुत्र देवों की प्रशंसा १-३ ११५. विश्वे देव की स्तुति १-३ पाप से छुटकारे का आग्रह २ ११६. विवस्वान की स्तुति १-३ क्रोध शांत हो ३ ११७. अग्नि की स्तुति १-३ ऋण की वापसी २ ११८. उग्रंपश्या एवं उग्रजिता अप्सराओं की स्तुति १-३ पाप ऋण से मुक्ति की कामना २ ११९. वैश्वानर अग्नि की स्तुति १-३ लौकिक और दैविक ऋणों रूप फंदों को ढीला करना २ १२०. अग्नि की स्तुति १-३ पृथ्वी, अदिति, अंतरिक्ष तथा आकाश का वर्णन २ स्वर्ग में अपने माता, पिता तथा पुत्रों से मिलना ३ १२१. बंधन के देवता निर्ऋति की स्तुति १-४ बंधनों से मुक्ति की कामना २ १२२. विश्वकर्मा की स्तुति १-५ अग्नि की स्तुति ४ इंद्र से अभिलाषा पूरी करने की कामना ५ १२३. स्वर्ग में विराजमान देवों की स्तुति १-५ पितरों का वर्णन ३ यज्ञ करना और दान देना ४ सोम से स्वर्ग में स्थित रहने की प्रार्थना ५ १२४. अग्नि की स्तुति १-३ जल वृक्ष का फल ही है २ १२५. वनस्पति की स्तुति १-३ वृक्ष से प्राप्त रस का वर्णन २ दिव्य गुणों से युक्त रथों की तुलना ३ १२६. दुंदुभि की स्तुति १-३ दुंदुभि से बल को बढ़ाने के लिए प्रार्थना २ इंद्र की प्रशंसा ३ १२७. विसर्प व्याधि ओषधि का वर्णन १-३ पीपुद्र नाम की ओषधि का वर्णन २ १२८. शंकधूम और चंद्रमा की स्तुति १-४ १२९. भग देव की प्रशंसा १-३ १३०. माष नाम की जड़ीबूटी का वर्णन १-४ ebook converter DEMO Watermarks*

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मरुद्गण और अग्नि देव की स्तुति ४ १३१. संकल्प की देवी आकूति की प्रशंसा १-३ १३२. देवों द्वारा कामदेव व उस की पत्नी आधि को जल में डुबोया जाना १-५ मित्र और वरुण देवों द्वारा कामदेव व उस की पत्नी आधि को जल में डुबोया जाना ५ १३३. शत्रु को मारने के लिए बांधी जाने वाली मेखला का वर्णन १-५ शत्रु के विनाश हेतु यमराज से प्रार्थना ३ १३४. वज्र का वर्णन व स्तुति १-३ १३५. वज्र का वर्णन व स्तुति १-३ शत्रु का विनाश ३ १३६. कालमाची नामक जड़ीबूटी का वर्णन व स्तुति १-३ केशों को उत्पन्न करना और दृढ़ बनाना २ १३७. वनस्पति की प्रशंसा १-३ केशों का बढ़ना ३ १३८. शक्तिहीन करने वाली जड़ीबूटी १-५ वीर्यवाहिनी नाड़ियों का नाश ४ १३९. शंखपुष्पी जड़ीबूटी का वर्णन १-५ १४०. ब्रह्मणस्पति देव और जातवेद अग्नि की स्तुति १-३ १४१. वायु, त्वष्टा, रुद्र देव आदि की गायों की वृद्धि और चिकित्सा के लिए स्तुति १-३ गायों की असीमित वृद्धि के लिए अश्विनीकुमारों की प्रशंसा ३ १४२. जौ नामक अन्न की प्रशंसा १-३ जौ को खाने और ले जाने वाले विनाश रहित हों ३ सातवां कांड सूक्त विषय मंत्र १. प्रजापति द्वारा संसार के लोगों को अपने अपने कर्म करने की प्रेरणा देना १-२ २. प्रजापति की स्तुति १ ३. प्रजापति की स्तुति १ ४. वायु देव की स्तुति १ ५. यज्ञ रूप प्रजापति की प्रशंसा १-५ ६. पृथ्वी एवं देवमाता का वर्णन १-२ ebook converter DEMO Watermarks*

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७. अदिति की स्तुति १-२ ८. अदिति के पुत्रों अर्थात देवों का वर्णन १ ९. बृहस्पति की स्तुति १ १०. सब के पोषक सूर्य देव की स्तुति १-४ ११. सरस्वती की स्तुति १ १२. पर्जन्य देव की स्तुति १ १३. प्रजापति की दोनों पुत्रियों, सभा तथा सभासदों की स्तुति १-४ १४. द्वेष करने वाले पुरुषों के तेज का विनाश १-२ १५. सविता देव की स्तुति १-४ १६. सब के प्रेरक सविता देव की स्तुति १ १७. बृहस्पति एवं सविता देव की स्तुति १ १८. धाता देव की स्तुति १-४ सविता व प्रजापति की स्तुति ४ १९. धाता की प्रशंसा १-२ २०. प्रजापति और धाता की स्तुति १ २१. अनुमति नामक देवी की प्रशंसा १-६ सुख प्राप्त करने का अनुग्रह ३ सुप्रणीति देवी से यज्ञ पूर्ण करने का आग्रह ४ २२. पुरातन सूर्य की प्रशंसा १ २३. सत्कर्म की प्रेरणा देने के लिए सूर्य देव की स्तुति १-२ २४. दुःस्वप्न विनाश की कामना १ २५. सविता व प्रजापति देव की आराधना १ २६. विष्णु और वरुण की प्रशंसा १-२ २७. विष्णु के वीरतापूर्ण कर्मों का वर्णन १-८ २८. इडा की स्तुति १ २९. काम में आने वाले उपकरणों की प्रशंसा १ ३०. अग्नि और विष्णु की स्तुति १-२ ३१. देवों से यज्ञ के यूपों को रंगने की कामना १ ३२. धनवान एवं शौर्य संपन्न इंद्र की प्रशंसा १ ३३. अग्नि देव की स्तुति १ ३४. मरुत् आदि देवगणों से सुखसमृद्धि की कामना १ ३५. अग्नि देव व अदीना देवमाता की प्रशंसा १ ३६. अग्नि से शत्रुओं के विनाश की कामना १-३ विद्वेष करने वाली स्त्री २ संतान रहित नारी ३ ebook converter DEMO Watermarks*

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३७. पत्नी तथा पति का परस्पर अनुरक्त होना १ ३८. मंत्र से युक्त वस्त्र १ ३९. सौवर्चा नामक जड़ी का वर्णन १-५ पति वशीकरण २ शंखपुष्पी ३ ४०. सारस्वत देव की प्रशंसा १ ४१. सरस्वन् देवी की स्तुति १-२ ४२. सूर्य और इंद्र की स्तुति १-२ ४३. अमीवा नामक रोग के लिए सोम एवं रुद्र देव की प्रार्थना १-२ ४४. वाणियों के रूप १ ४५. इंद्र और विष्णु की आराधना १ ४६. सक्तुमंथ नामक जड़ीबूटी का वर्णन १ ४७. ईर्ष्या को शांत करने के लिए आग्रह १ ४८. सिनीवाली की प्रशंसा १-३ ४९. कुहू की प्रशंसा १-२ ५०. शोभित व शोभन स्तुति वाली पूर्णिमा का आह्वान १-२ ५१. सुख के लिए देव पत्नियों की स्तुति १-२ ५२. अग्नि की स्तुति १-९ जुआरियों का वध १ जुआरियों को जीतने के लिए इंद्र से प्रार्थना ४ इंद्र की प्रशंसा ७ विजय के लिए पासों की पूजा ९ ५३. शत्रु से रक्षा के लिए बृहस्पति व इंद्र की प्रशंसा १ ५४. आपस में सौमनस्य के लिए अश्विनीकुमारों की आराधना १-२ ५५. बृहस्पति, अग्नि और अश्विनी कुमारों की स्तुति १-७ प्राण और अपान वायु २ आयु की कामना ३ स्वर्ग में आरोहण ७ ५६. इंद्र से सुख की कामना १ ५७. ऋग्वेद और सामवेद का पूजन १-२ ५८. मधु नामक जड़ीबूटी का वर्णन १-८ सर्प का विष निकालना २ शर्कोटक सर्प के टुकड़े ५ परपीडादायक बिच्छू ६ विषनाशक जड़ीबूटी ७ ५९. सरस्वती की स्तुति १-२ ebook converter DEMO Watermarks*