अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२४. आसुरी माया से उत्पन्न वनस्पति का वर्णन १-४ २५. यक्ष्मा नाशक अग्नि की स्तुति १-४ २६. इंद्र, मरुत् व पर्जन्य देव की स्तुति १-४ २७. शत्रु सेना को पराजित और अपनी सेना को आगे बढ़ाने के लिए इंद्र पत्नी की स्तुति १-४ २८. अग्नि देव की स्तुति १-४ २९. ब्रह्मणस्पति देव की स्तुति १-६ ३०. विश्वे देव, आदित्य एवं वसु की स्तुति १-४ ३१. इंद्र, यम आदि चार देवों के लिए मंत्रों की आहुति १-४ देव कुबेर से स्वर्ण व रजत आदि धन देने का आग्रह ४ ३२. पृथ्वी और आकाश को नमन १-४ ३३. रोग विनाशक जल देव की स्तुति १-४ ३४. मधु लता का वर्णन १-५ ३५. हिरण्य का वर्णन १-४ दूसरा कांड सूक्त विषय मंत्र १. ब्रह्म और आत्मा का वर्णन १-५ २. ब्रह्म के रूप में सूर्य की आराधना १-५ ३. स्राव विरोधी ओषधि का वर्णन १-६ ४. जंगिड़ वृक्ष से निर्मित जंगिड़ मणि का वर्णन १-६ ५. इंद्र की स्तुति १-७ ६. अग्नि देव की स्तुति १-५ ७. पाप का विनाश करने वाली मणि का गुणगान १-५ ८. यक्ष्मा और कुष्ठ रोगों से मुक्त करने वाले तारे १-५ ९. वनस्पतियों से निर्मित मणि का वर्णन १-५ १०. द्यावा और पृथ्वी का विभिन्न रोगों में कल्याणकारी होना १-८ ११. तिलक वृक्ष से निर्मित मणि १-५ १२. द्यावा, पृथ्वी और अंतरिक्ष के अधिपति देव क्रमशः अग्नि, वायु और सूर्य का वर्णन १-८ १३. अग्नि, बृहस्पति और विश्वे देव का गुणगान १-५ १४. अग्नि, भूतपति तथा इंद्र की स्तुति १-६ ebook converter DEMO Watermarks*