भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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१५. प्राणों को बल प्रदान करना १-६ १६. प्राण और अपान से मृत्यु से रक्षा के लिए प्रार्थना १-५ द्यावा और पृथ्वी की स्तुति २ १७. अग्नि की ओज के रूप में स्तुति १-७ १८. अग्नि देव से शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना १-५ १९. अग्नि देव की स्तुति १-५ २०. वायु देव की स्तुति १-५ २१. सूर्य देव की स्तुति १-५ २२. चंद्र देव की स्तुति १-५ २३. जल देव की स्तुति १-५ २४. राक्षसों के स्वामी से अनुरोध १-८ २५. रोग को पराजित करने वाली जड़ी पृश्निपर्णी का वर्णन १-५ २६. सविता देवता की प्रशंसा १-५ २७. ग्वारपाठा नामक जड़ी का वर्णन १-७ २८. अग्नि देव की स्तुति १-५ २९. अग्नि, सूर्य और इंद्र की स्तुति १-७ ३०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-५ ३१. मही देवता द्वारा कीटाणुओं का नाश १-५ ३२. सूर्य की किरणों द्वारा कीटाणुओं का नाश १-६ ३३. यक्ष्मा रोग का विनाश १-७ ३४. विश्वकर्मा की स्तुति १-५ ३५. विश्वकर्मा की स्तुति १-५ ३६. अग्नि, सोम व वरुण की स्तुति १-८ तीसरा कांड सूक्त विषय मंत्र १. अग्नि, मरुत् व इंद्र देव की स्तुति १-६ २. अग्नि, इंद्र और मरुत् से शत्रुओं का विनाश करने का अनुरोध १-६ ३. अग्नि की स्तुति १-६ ४. इंद्र देव से राजा, राज्य पुनः प्राप्त होना १-७ ५. ओषधियों की सार रूप पर्णमणि का वर्णन १-८ ebook converter DEMO Watermarks*