अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextयदाततमव तत्तनु यदुत्ततं नि तत्तनु.. (३) जिस प्रकार जार का प्रजनन अंग नारी संभोग के योग्य न रहे तथा नारी के समीप व्यर्थ सिद्ध हो, उस प्रकार जार परकीया स्त्रियों में संभोग रहित हो जाए. जो जार संभोग हेतु बुलाए जाने पर नारी को अत्यधिक व्यथित करता था, उस जार का विशाल प्रजनन अंग छोटा हो जाए तथा उस का ऊपर उठा हुआ प्रजनन अंग नीचे को झुक जाए. (३) सूक्त-९६ देवता—चंद्रमा, इंद्र इन्द्रः सुत्रामा स्ववाँ अवोभिः सुमृडीको भवतु विश्ववेदाः. बाधतां द्वेषो अभयं नः कृणोतु सुवीर्यस्य पतयः स्याम.. (१) भली प्रकार रक्षा करने वाले एवं धन के स्वामी इंद्र अपने रक्षा साधनों से हमें सभी प्रकार सुखी बनाएं. वह इंद्र हमें अभय प्रदान करें तथा हम शोभन शक्ति वाले धन के स्वामी बनें. (१) सूक्त-९७ देवता—चंद्रमा, इंद्र स सुत्रामा स्ववाँ इन्द्रो अस्मदाराच्चिद् द्वेषः सनुतर्युयोतु. तस्य वयं सुमतौ यज्ञियस्यापि भद्रे सौमनसे स्याम.. (१) शोभन रक्षा वाले एवं धन के स्वामी इंद्र हम से दूर से ही द्वेष करने वालों को नष्ट करें. हम यज्ञ के योग्य इंद्र की शोभन बुद्धि में हों तथा वह हमारे प्रति सौमनस्य रखें. (१) सूक्त-९८ देवता—इंद्र इन्द्रेण मन्युना वयमभि ष्याम पृतन्यतः. घ्नन्तो वृत्राण्यप्रति.. (१) सहायक इंद्र के कोप के कारण हम संग्राम की इच्छा रखने वाले शत्रुओं को पराजित करें. पापों को इंद्र इस प्रकार नष्ट करें कि वह शेष न बचें. (१) सूक्त-९९ देवता—सोम ध्रुवं ध्रुवेण हविषा ऽ व सोमं नयामसि. यथा न इन्द्रः केवलर्विशः संमनसस्करत्.. (१) हम सोमरस को रथ में आसीन कर के हवि के साथ लाते हैं, जिस से इंद्र हमारी संतानों को असाधारण एवं परस्पर सौमनस्य वाली बनाएं. (१) ebook converter DEMO Watermarks*