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आयुर्वेद दर्शन

आयुर्वेद दर्शन

Ayurveda Darshan

by वैद्य महादेव चन्द्रशेखर पाठक

Source: 1949 Edition · De Ra Ekatara Indoor · 1949 (origin)

DevanagariHindipublished235 pages

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इन्द्रियों में सत्व की वृत्तियाँ...२६
मन के अस्तित्व, स्वरूप और कार्य के विषय में...२१
बुद्धि के प्रकार...२४
आत्मवाद का उपसंहार...२४
शरलोभा का सख वाद...
आत्मवादका प्रतिवाद सत्त्वेके पुरुष रोगो त्यादकत्वका समर्थन२६
सत्ववाद में आत्मा का औदासिन्य...२६
सत्ववाद का सौश्रुतिक प्रकृति पुरुष वाद से संबंध......२६
सौश्रुतिक प्रकृतिपुरुषवाद और उसकी विशेषताएँ......२७
आत्मा को असर्वगत कहनेवालों का मतभेद...३२
वायोंविद् का रसवाद और त्रिधातु सिद्धांत...३४
सत्ववाद का प्रतिवाद...३४
रस के पुरुष-रोगोत्यादकत्व का समर्थन...३६
वैदिक रस अथवा सोम...३६
अगीषोम लोकपक्षियों की और वायोंविद् की दृष्टि में
रस का घर्मात्मकत्व...३७
रस के विषय में पंचात्मक लोकपक्षियों का मत...३७
रस जन्म सचेतन घटक और सचेतन घटकों का
भिन्न २ प्रकार से वर्गीकरण...३८
सचेतन द्रव्यों के वर्गीकरण में षड् रस प्रयुक्त और
गुण प्रयुक्त मतभेद...४०
पंचात्मक लोकपक्षियों की द्रव्यप्रधानता...४५
त्रिधातु सिद्धांत का आरंभ...४६