आयुर्वेद दर्शन

आयुर्वेद दर्शन
Ayurveda Darshan
by वैद्य महादेव चन्द्रशेखर पाठक
Source: 1949 Edition · De Ra Ekatara Indoor · 1949 (origin)
DevanagariHindipublished235 pages
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| वातपित्त-क्षेप्माका ओं का इतिहास | ... | ४७ |
|---|---|---|
| पहिला वर्गीकरण | ... | ४९ |
| ओज, तेज व धातुप्रसाद | ... | ५१ |
| ओज तेज ऊष्मादिकों का क्षेप्मपित्तवातों में समन्वय | ... | ५९ |
| वासु के विषय में | ... | ६४ |
| दूसरा वर्गीकरण | ... | ६७ |
| वातपित्त-क्षेप्माओं की प्राकृत वैकृत अवस्थाएँ | ... | ६८ |
| अणु अवयवों के अथवा गर्भांकुर के रासायनिक संगठन में क्षेप्मपित्तवात | ... | ७० |
| दोष प्रकृति | ... | ७६ |
| वातादिकों का द्वैविध्य | ... | ८० |
| ब्रह्मादिगुण प्रधानता वादियों की पांचभौतिकी प्रकृति | ... | ८० |
| वातपित्त-क्षेप्माओं का लोकगत अधिष्ठान | ... | ८१ |
| अशीषोसवाद | ... | ८२ |
| वातकला कर्लीब परिषद | ... | ८५ |
| तीसरा वर्गीकरण | ... | ९० |
| हरिणयाक्ष कुशिक और षड्धातुवाद | ... | ९१ |
| रसवाद का प्रतिवाद | ... | ९१ |
| पुरुषरोगोत्पत्ति में षड्धातुओं का समर्थन | ... | ९१ |
| भारद्वाजीय गर्भावक्रांति का खंडन | ... | ९२ |
| षड्धातुवादियों का सामान्य सिद्धांत | ... | ९३ |
| चेतनाधातु | ... | ९३ |