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बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

by महर्षि बौधायन

Source: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (origin)

DevanagariHindipublished486 pages

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३६८बौधायन-धर्मसूत्रम्[ ऋतुगमनातिक्रमनिन्दा

अनु०—जो पुरुष ऋतुस्नान करने वाली पत्नी के निकट रहते हुए भी उससे मैथुन रत नहीं होता उसके पूर्वज उस मास में उसकी पत्नी के रजस्राव में ही पड़े रहते हैं ॥ २० ॥

ऋतुगमनातिक्रमनिन्दैषा ॥ २० ॥

ऋतौ नोपैति यो भार्यामनृतौ यश्च गच्छति ।
तुल्यमाहुस्तयोर्दोषमयोनौ यश्च सिञ्चति ॥ २१ ॥

अनु०—जो पुरुष ऋतुकाल में पत्नी से मैथुन नहीं करता, जो ऋतुकाल से भिन्न समय में पत्नी से मैथुन करता है, और जो पत्नी की योनि से भिन्न स्थान में अप्राकृतिक मैथुन द्वारा वीर्यपात करता है, इन सभी के दोष समान रूप से घोर होते हैं ॥ २१ ॥

त्रयाणामपि भ्रूणहत्यादोषस्तुल्यः सत्पुत्रोत्पत्तिनिरोधात् ॥ २१ ॥

भर्तुः प्रतिनिवेशेन या भार्या स्कन्दयेदृतुम् ।
तां ग्राममध्ये विख्याप्य भ्रूणघ्नीं निर्धमेदगृहात् ॥ २२ ॥

अनु०—जो पत्नी पति की इच्छा होने पर भी मैथुन से विरत रहती है और (ओषधि आदि द्वारा $^१$ रजोहानि कर सन्तानोत्पत्ति में बाधा पहुँचाती है, उसे गाँव के लोगों के समक्ष भ्रूणघ्नी घोषित कर घर से निकाल दे ॥ २२ ॥

प्रतिनिवेशः प्रतिकूलता अनिच्छा वा । स्कन्दयेत् गमयेत् शोषयेद्वा भर्तुर्द्वेषाद्रज औषधादिभिश्चाशोषयन्तीमित्यर्थः । ग्राममध्ये जनसन्निधौ निर्धमेत् प्रस्थापयेत् त्यजेत् । ऋत्वतिक्रमे भर्तुर्यथा भ्रूणहत्या तथाऽस्या अपीति निन्दैषा ॥ २२ ॥

ऋतुगमनातिक्रमे प्रायश्चित्तमाह—

ऋतुस्नातां न चेद्गच्छेन्नियतां धर्मचारिणीम् ।
नियमातिक्रमे तस्य प्राणायामशतं स्मृतम् ॥ २३ ॥

अनु०—जो पति मासिक धर्म के बाद स्नान करने वाली और धर्म पूर्ण आचरण करने वाली पत्नी से मैथुन के नियम का उल्लंघन करता है, उसके लिए प्रायश्चित्त के लिए सो प्राणायाम करने का विधान है ॥ २३ ॥

नियमातिक्रमः ऋतुगमनातिक्रमः । ऋत्वतिक्रमो वा । ऋज्वन्यत् ॥ २३ ॥


१. एतत्प्रकरणस्थानि १७–१८, २०, २३ सूत्राणि मानववासिष्ठैः संवदन्ति ।