बेताल पच्चीसी
Betal Pachisi
by महाकवि सोमदेव / बेताल भट्ट
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Read in contextबेताल ने यह अत्यंत अद्भुत कथा सुनाकर राजा विक्रमादित्य से पूछा—‘‘राजन, अब तुम यह बताओ कि उन दोनों में अधिक पराक्रमी शंखचूड़ था या जीमूतवाहन ? यदि तुम जानते हुए भी इस बात का उत्तर न दोगे तो तुम्हारा सिर खंड-खंड हो जाएगा।’’
बेताल की यह बात सुनकर शाप के भय से राजा विक्रमादित्य ने मौन त्याग दिया और उद्वेग-रहित होकर कहा—‘‘बेताल, जीमूतवाहन ने जो कुछ किया, उसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है क्योंकि उसे अनेक जन्मों की सिद्धियां प्राप्त थीं। सराहने योग्य तो शंखचूड़ ही है। उसके शत्रु को किसी और ने अपना शरीर अर्पित कर दिया था और गरुड़ उसे लेकर दूर चला गया था। फिर भी वह भागा-भागा उनके पीछे वहां गया और उसने हठपूर्वक अपना शरीर प्रस्तुत किया।’’
राजा का यह सटीक उत्तर सुनकर बेताल उसके कंधे से उतरकर फिर उसी शिंशपा-वृक्ष की ओर उड़ गया। राजा भी उसे पुनः लाने के लिए उसके पीछे-पीछे दौड़ गया।
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