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बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी

Betal Pachisi

by महाकवि सोमदेव / बेताल भट्ट

DevanagariHindipublished151 pages

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वृद्धा तो मर गई किंतु ईश्वर की कृपा से मेरे प्राण बच गए। मैं खंदक में चीखती-चिल्लाती रही। देवयोग से एक पथिक ने मेरी आवाज सुन ली और मुझ पर कृपा करके मुझे खंदक से बाहर निकाला। मैं किसी प्रकार मार्ग में राहगीरों से रास्ता पूछती हुई यहां तक पहुंची हूं। ”

बेटी के मुख से उसकी विपदा का हाल सुनकर उसके माता-पिता ने उसे धीरज बंधाया। तब वह सती अपने पति का ध्यान करती हुई माता-पिता के पास ही रहने लगी।

उधर उसके पति ने स्वदेश पहुंचकर थोड़े ही दिनों में अपने साथ लाया हुआ धन जुए आदि में गंवा दिया। जब वह बिल्कुल कंगाल हो गया तो उसने सोचा, “क्यों न अपने श्वसुर के पास जाकर फिर धन मांग लाऊं। मैं उनसे कहूंगा कि उनकी पुत्री उसके घर भली प्रकार रह रही है।”

ऐसा विचार कर वह ससुराल की ओर चल पड़ा। जैसे ही वह ससुराल के करीब पहुंचा, छत पर खड़ी, उसी दिशा में देखती उसकी पत्नी ने उसे पहचान लिया और तुरंत दौड़ते हुए नीचे उतर आई। दौड़कर वह उस पापी के चरणों में जा गिरी।

डरे हुए अपने पति को उसने वह सारा वृत्तांत कह सुनाया कि पहले किस प्रकार उसने झूठ-मूठ अपने पिता से डाकुओं के उपद्रव की बात कही थी।

सारी बात जानकर धनदत्त में हौसला पैदा हो गया और उसने निर्णय लेकर अपने श्वसुर के घर में प्रवेश किया। उसके श्वसुर ने प्रसन्नतापूर्वक अपने दामाद का स्वागत-सत्कार किया। इस प्रसन्नता में कि उसका दामाद डाकुओं की गिरफ्त से जीवित बच आया है, उसने अपने मित्रों और संबंधियों को बुलाकर महोत्सव मनाया। तत्पश्चात् धनदत्त वहां अपनी पत्नी सहित अपने श्वसुर के धन पर फिर से मौज करने लगा।

इतनी कथा सुनाकर मैना ने आगे का वृत्तांत कहा—“हे राजन, एक बार रात के समय उस नृशंस ने जो कुछ किया, वह यद्यपि कहने के योग्य नहीं है किंतु फिर भी कथा के प्रसंग में कहना पड़ रहा है। उस दुष्ट ने अपनी गोद में सोई हुई पत्नी की हत्या कर दी और उसके सारे गहने लेकर चुपचाप अपने देश की ओर चला गया।”

जब मैना ने आक्षेप लगाया कि पुरुष ऐसे पापी होते हैं, तो राजपुत्र ने तोते से कहा—“हे शुक, सारिका अपनी बात कह चुकी है। प्रत्युत्तर में तुम्हें जो भी कहना है, कहो।”

तब तोते ने उन्हें यह कथा सुनाई।

शुक द्वारा कही हुई कथा

तोता बोला—“हे देव ! स्त्रियां भयानक साहस वाली, दुश्चरित्रा और पापिनी होती हैं। इस संदर्भ में आप यह कथा सुनिए।”

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