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बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी

Betal Pachisi

by महाकवि सोमदेव / बेताल भट्ट

DevanagariHindipublished151 pages

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अकारण ही इस व्यक्ति को प्राणदंड नहीं देना चाहिए। यह निर्दोष है, सारी बातें मैं जानता हूं। तुम लोग मुझे राजा के पास ले चलो, जिससे मैं उन्हें सारा वृत्तांत कह सकूं। '' उसके ऐसा कहने पर कर्मचारी उसे राजा के पास ले गए। वहां अभयदान मांगकर उस चोर ने आरंभ से उस रात की सारी बातें राजा को कह सुनाईं। उसने राजा से कहा—''महाराज, यदि आपको मेरी बातों पर विश्वास न हो तो सत्य की स्वयं ही जांच करवाएं। इसकी कटी हुई नाक अब भी उस शव के मुंह में है। '' यह सुनकर राजा ने देखने के लिए अपने अनुचरों को उद्यान में भेजा और जब सच्चाई मालूम हुई तो उसने समुद्रदत्त को रिहा कर दिया। राजा ने उस दुष्ट पत्नी के कान भी कटवा दिए और उसे देश-निकाला दे दिया। उसने उसके श्वसुर की सारी धन-संपत्ति भी जब्त करवा ली। इतना ही नहीं, उस चोर पर प्रसन्न होकर उसे नगर का अध्यक्ष भी नियुक्त कर दिया। इतनी कथा सुनकर तोते ने राजा से कहा—''हे राजन, इस संसार में स्त्रियां ऐसी दुष्ट और स्वभाव से विषम होती हैं।'' इतना कहते ही, उस तोते पर से इंद्र का श्राप जाता रहा और वह चित्ररथ नाम का गंधर्व बनकर, दिव्य शरीर धारण कर स्वर्ग को चला गया। उसी तरह तत्काल ही मैना का भी श्राप दूर हो गया और वह भी तिलोत्तमा नाम की अप्सरा बनकर सहसा ही स्वर्ग चली गई। यह कथा सुनाकर बेताल ने राजा विक्रमादित्य से पूछा—''राजन, तोता-मैना के अपने-अपने आक्षेपों का निराकरण हो गया था। अब तुम बताओ कि स्त्रियां निंदित होती हैं अथवा पुरुष ? जानते हुए भी यदि तुम कुछ नहीं बताओगे तो तुम्हारा मस्तक टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।'' कंधे पर बैठे हुए बेताल की बातें सुनकर राजा ने कहा—''हे बेताल, निंदित तो स्त्रियां ही होती हैं। पुरुष शायद ही कोई, कभी और कहीं, वैसा दुराचारी होता है लेकिन ज्यादातर स्त्रियां प्रायः सभी जगह और सदा ही, वैसी होती हैं।'' राजा के ऐसा कहते ही बेताल पहले की तरह फिर उसके कंधे से गायब हो गया। राजा भी उसे वापस लेने के लिए फिर से उसी वृक्ष की ओर चल पड़ा।

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