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बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी

Betal Pachisi

by महाकवि सोमदेव / बेताल भट्ट

DevanagariHindipublished151 pages

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कौन बड़ा जटिल है ? आप स्वयं ही सोचिए, उस शूद्र जुलाहे को क्षत्रिय कन्या कैसे दी जा सकती है ? वैश्य को भी क्षत्रिय कन्या नहीं दी जा सकती और फिर उसे, जिसे पशि-पक्षियों की भाषा का ज्ञान है, उसका भी क्या उपयोग है ? तीसरा, जो ब्राह्मण, अपना स्वयं का काम छोड़कर बाजीगर बन गया है, वह भी उसके पति होने के योग्य नहीं है, क्योंकि वह ब्राह्मण अपना काम छोड़कर पतित बन गया है। अतः राजपुत्री के योग्य तो वह क्षत्रिय पुरुष है। उसी से राजपुत्री का विवाह करना उचित है जो कुल में समान है। अपनी विद्या जानने वाला तथा पराक्रमी है।"

राजा की बात सुनकर बेताल ने कहा—"राजन, तुमने बिल्कुल सही उत्तर दिया। राजकुमारी का विवाह उसी से होना चाहिए क्योंकि समान कुल और पराक्रमी व्यक्ति के साथ ही कन्या का विवाह अनुकूल होता है। पर, मेरे प्रश्न का उत्तर देते समय तुम हम दोनों के बीच हुई शर्त को भूल गए, अतः अब मैं चलता हूं।"

यह कहकर बेताल राजा के कंधे से उतर गया और पुनः उसी शिंशपा-वृक्ष की ओर उड़ गया, जहां से विक्रमादित्य उसे लाए थे।

राजा विक्रमादित्य ने भी अपना हौसला न खोया। बेताल के जाते ही वह भी पुनः उसे लाने के लिए उस महाश्मशान में उसी वृक्ष की ओर चल पड़ा।

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