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बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी

Betal Pachisi

by महाकवि सोमदेव / बेताल भट्ट

DevanagariHindipublished151 pages

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पंद्रहवां बेताल

शशिप्रभा की कथा

पहले की ही भांति राजा विक्रमादित्य पुनः उस शिशपा-वृक्ष के पास जा पहुंचा। बेताल को उतारकर कंधे पर डाला और खामोशी से अपने गंतव्य की ओर चल पड़ा। रास्ते में फिर बेताल ने मौन भंग करते हुए कहा—"राजन ! सचमुच ही तुम बहुत परिश्रम कर रहे हो, तुम्हारे श्रम को भुलाने के लिए इस बार मैं तुम्हें यह कथा सुनाता हूं किंतु शर्त वही रहेगी कि कथा के दौरान तुम मौन धारण किए रहोगे। यदि तुमने मौन भंग किया तो मैं पुनः अपने स्थान पर लौट जाऊंगा।"

विक्रमादित्य ने सहमति जताई तो बेताल ने उन्हें यह कथा सुनाई।

नेपाल में शिवपुर नाम का एक नगर था। वहां यशःकेतु नाम का एक राजा राज करता था। वह राजा अपने नाम के अनुसार ही यशस्वी था। प्रज्ञासागर नाम के अपने मंत्री को राज्यभार सौंपकर वह चंद्रप्रभा नाम की अपनी रानी के साथ सुख-भोग करता था। समय पाकर अपनी रानी से उसे शशिप्रभा नाम की एक कन्या उत्पन्न हुई। जब वह कन्या युवती हुई, तब एक बार बसंत ऋतु में यात्रा उत्सव देखने के लिए राजा अपनी रानी एवं कन्या सहित यात्रा का मेले देखने के लिए निकले।

उस मेले में एक धनी बाप का बेटा मनःस्वामी नाम का एक ब्राह्मण भी आया हुआ था। मेले के एक भाग में फूल चुनने को उद्यत उसने शशिप्रभा को देखा तो उस पर मोहित हो गया। मनःस्वामी सोचने लगा—'क्या यह रति है, जो कामदेव का बाण बनाने के लिए बसंत के द्वारा सुसज्जित पुष्पों को एकत्र कर रही है अथवा यह कोई वनदेवी है जो बसत-पूजन करने की इच्छा रखती है ?' वह ऐसा सोच ही रहा था कि उस राजकुमारी ने भी उसे देख लिया। कामदेव के समान मनःस्वामी को देखते ही वह भी उत्कंठित हो गई। तब न उसे फूलों की सुध-बुध रही, न अपने अंगों तथा अपने शरीर की। इस प्रकार वे एक-दूसरे के प्रेमरस में लीन रहे। उसी समय 'हाय-हाय' का शोर सुनाई दिया।

'क्या हुआ' यह जानने के लिए कंधे उचकाकर जब उन दोनों ने देखा तो उन्हें दौड़कर आता हुआ एक उन्मत्त हाथी दिखाई पड़ा। किसी दूसरे हाथी की गंध पाकर वह हाथी उन्मत्त हो गया था जो अपने खूंटों को उखाड़कर वृक्षों को रौंदता हुआ उसी दिशा में आ रहा था। उस पर महावत का एक अंकुश भी लटका दिखाई दे रहा था।

उसे देखकर भय से घबराए हुए राजकुमारी के अंगरक्षक भाग निकले। तब मनःस्वामी ने दौड़कर अकेले ही राजकुमारी को अपने दोनो हाथों से उठा लिया।

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