भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
by श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या
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Read in contextअनुक्रमणिका भूमिका १- प्रस्तावना १ पूर्व विभाग १. शुद्ध भक्तियोग के लक्षण ८ २. साधनभक्ति २२ ३. भक्तियोग के अधिकारी के लक्षण ३० ४. भक्तियोग सब मोक्षों से बढ़कर है ३६ ५. भक्तियोग का शुद्ध स्वरूप ४४ ६. भक्ति के साधन ४६ ७. भक्ति के अंगों के प्रमाण ५३ ८. वर्जनीय अपराध ६१ ६. भक्ति के सब अंगों का विशद विवेचन ६५ १०. श्रवण-स्मरण की कला ७७ ११. भगवत्सेवा के नाना रूप ८३ १२. भक्ति के अंग ८८ १३. भक्ति के पाँच शक्तिशाली साधन ९५ १४. भक्ति की योग्यता ९६ १५. रागानुगाभक्ति १०५ १६. रागानुगाभक्ति (२) ११० १७. भाव ११५ १८. भाव के लक्षण (अनुभाव) ११६ १६. प्रेमभक्ति १२६ दक्षिण विभाग २०. रस १३१ २१. श्रीकृष्ण के दिव्य गुण १३४ २२. श्रीकृष्ण के गुण १५२ २३. श्रीकृष्ण का स्वरूप १६६ २४. श्रीकृष्ण के वैशिष्ट्य १७३ २५. श्रीकृष्णभक्त १७६